हाईकोर्ट से मेवाड़ यूनिवर्सिटी को राहत:राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगी

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चेयरमैन बोले- तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे एडमिशन

चित्तौड़गढ़, 20 जून: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ से मेवाड़ यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसके तहत यूनिवर्सिटी में नए स्टूडेंट्स के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था। इस अंतरिम राहत के बाद यूनिवर्सिटी में एडमिशन प्रक्रिया फिर से सामान्य रूप से जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।
यह मामला चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी का है, जहां राज्य सरकार ने 1 जून को एक आदेश जारी कर नए एडमिशन पर रोक लगा दी थी। अब हाईकोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में यूनिवर्सिटी की दलीलों को सुनने के बाद इस आदेश पर रोक लगा दी है।
ऐसे में फिलहाल यूनिवर्सिटी को राहत मिल गई है और प्रवेश प्रक्रिया पर तत्काल असर पड़ने वाली स्थिति टल गई है।
जोधपुर पीठ ने नोटिस जारी किया, 1 जून 2026 के आदेश पर लगाई रोक
यह राहत राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ के न्यायाधीश जस्टिस मुकेश राजपुरोहित की अवकाशकालीन एकलपीठ ने दी। मेवाड़ यूनिवर्सिटी और मेवाड़ एजुकेशन सोसायटी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।
साथ ही 1 जून के उस विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, जिसमें यूनिवर्सिटी में नए एडमिशन पर प्रतिबंध लगाया गया था। अदालत के इस आदेश का मतलब यह है कि फिलहाल राज्य सरकार का वह फैसला लागू नहीं होगा, जब तक मामले पर आगे सुनवाई नहीं हो जाती।
इस आदेश से उन स्टूडेंट्स और अभिभावकों को भी राहत मिली है, जो यूनिवर्सिटी में एडमिशन को लेकर असमंजस में थे। अब मामला कोर्ट में विचाराधीन रहेगा और आगे की सुनवाई में राज्य सरकार और यूनिवर्सिटी दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात रखेंगे।
यूनिवर्सिटी ने कोर्ट में कहा- जवाब दे चुके हैं, जांच और विचार प्रक्रिया अभी बाकी है
सुनवाई के दौरान मेवाड़ यूनिवर्सिटी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि साल 2025 में राज्य सरकार की तरफ से जो कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, उनके जवाब समय पर दे दिए गए थे। यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा कि उन जवाबों पर सरकार की ओर से विचार की प्रक्रिया अभी जारी है और जांच भी अभी पूरी नहीं हुई है।
इसके बावजूद नए एडमिशन पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया गया। यूनिवर्सिटी का कहना था कि जब जवाबों पर अंतिम फैसला ही नहीं हुआ और जांच प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई, तब इस तरह का प्रतिबंधात्मक आदेश उचित नहीं था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी यह बात सामने आई कि यूनिवर्सिटी द्वारा दिए गए जवाबों पर विचार चल रहा है और जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
इसी आधार पर कोर्ट ने मामले को सुनवाई योग्य माना और अंतरिम राहत देते हुए आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
चेयरमैन बोले- तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी प्रवेश प्रक्रिया
मेवाड़ यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अशोक गदिया ने कोर्ट से राहत मिलने के बाद कहा कि यूनिवर्सिटी हमेशा कानून और नियम प्रावधानों का पालन करती रही है और आगे भी करती रहेगी। यूनिवर्सिटी की ओर से स्टूडेंट्स और अभिभावकों को यह भरोसा दिलाया गया है कि प्रवेश प्रक्रिया पहले से तय प्रोग्राम के अनुसार जारी रहेगी। इस पूरे मामले का सबसे बड़ा असर एडमिशन लेने की तैयारी कर रहे छात्रों पर पड़ रहा था, क्योंकि सरकार के आदेश के बाद नए प्रवेश पर रोक लग गई थी। अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल वह रोक थम गई है और यूनिवर्सिटी को अस्थायी राहत मिल गई है।