निकाली खरपतवार, फिर झील में

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फतहसागर में सफाई के नाम पर लापरवाही! पानी में सड़ रही जलीय वनस्पति, पेयजल की गुणवत्ता पर मंडराया खतरा
उदयपुर, 5 नवम्बर:
झीलों की नगरी उदयपुर की प्रमुख पेयजल स्रोत फतहसागर झील में सफाई के नाम पर सरकारी धन खर्च करने के बावजूद गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। उदयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से प्रतिदिन लाखों रुपए खर्च कर मजदूरों से झील में फैली जलीय खरपतवार निकलवाई जा रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि निकाली गई खरपतवार को झील से बाहर ले जाने के बजाय वापस उसी के पानी में छोड़ दिया जा रहा है। नतीजतन, झील के कई हिस्सों में किनारों और पानी के भीतर खरपतवार के ढेर जमा हैं, जो अब सड़-गल रहे हैं।
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेजशंकर पालीवाल ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि एक तरफ झील की सफाई के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ निकाली गई जलीय खरपतवार को पानी में ही छोड़कर सफाई के उद्देश्य को ही निष्फल किया जा रहा है। पानी में सड़ती वनस्पति के आसपास बड़ी संख्या में कीटाणु और सूक्ष्म जीव पनप रहे हैं, जिन्हें पानी में स्पष्ट देखा जा सकता है। इससे झील के जल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि चिंता इसलिए भी अधिक है क्योंकि फतहसागर का पानी पेयजल आपूर्ति में उपयोग किया जाता है। वर्तमान में झील का जलस्तर पांच फीट से भी कम है। ऐसे में सीमित पानी में सड़ी-गली खरपतवार का जमा रहना जल की गुणवत्ता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
पालीवाल ने उदयपुर विकास प्राधिकरण से मांग की है कि झील से निकाली जा रही जलीय खरपतवार को तत्काल पूरी तरह बाहर निकलवाया जाए। साथ ही किनारों और पानी के भीतर जमा खरपतवार को भी हटाया जाए, ताकि सफाई के नाम पर खर्च हो रही राशि का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो और फतहसागर के पेयजल स्रोत को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।