उदयपुर संभाग में सैकड़ों भवनों पर खतरे की घंटी
उदयपुर, 23 जून : नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने में महज कुछ दिन शेष हैं, लेकिन उदयपुर जिले के जर्जर भवनों का संकट अब भी बना हुआ है। उदयपुर जिले के करीब एक लाख विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो पाई है। प्रशासन ने आठ सौ से धिक स्कूल भवनों में से 423 को जर्जर घोषित किया था, जिनमें 78 भवनों को ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि 345 भवन अब भी गिराए जाने बाकी हैं।
मंदिरों और निजी भवनों में लग रही कक्षाएं
भवनों की कमी के चलते डेढ़ सौ से अधिक विद्यालयों का संचालन मंदिरों, आंगनवाड़ियों, सामुदायिक भवनों, निजी भवनों और महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों में किया जा रहा है। सबसे अधिक प्रभावित प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां बच्चों को अस्थायी व्यवस्थाओं के भरोसे पढ़ाई करनी पड़ रही है।
उदयपुर संभाग में भी गंभीर स्थिति
उदयपुर संभाग में जर्जर स्कूल भवनों की समस्या व्यापक है। हाल ही में संभाग के जर्जर विद्यालय भवनों को चिन्हित किया गया था, जिनमें से केवल बीस फीसदी भवन ही ध्वस्त किए जा सके हैं। शेष भवनों को हटाने और नए निर्माण की प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है।
बजट और भूमि की बाधा
ननए भवनों के निर्माण के लिए डीएमएफटी फंड से केवल उदयपुर जिले के 33 स्कूलों के टेंडर जारी हुए हैं, जबकि राज्य सरकार द्वारा घोषित अन्य विद्यालय भवनों के लिए अब तक बजट जारी नहीं हुआ। वहीं 83 विद्यालय भूमि पट्टों के अभाव से जूझ रहे हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों को जर्जर भवनों में नहीं बैठाया जाएगा तथा विधायक, सांसद और अन्य मदों से बजट उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं।