12 साल की उम्र में ट्रेन हादसे में गंवाए थे दोनों पैर, उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान ने जापानी-जर्मन तकनीक से दिया नया जीवन
उदयपुर, 20 जुलाई: 12 वर्ष की उम्र में एक ट्रेन हादसे में दोनों पैर गंवाने वाली उत्तर प्रदेश के बहराइच की 26 वर्षीय चांदनी ने 14 साल बाद फिर अपने पैरों पर चलने का सपना साकार कर लिया। उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान में जापानी और जर्मन तकनीक से तैयार 3D प्रिंटेड कृत्रिम पैर लगाए जाने के बाद अब वह बिना सहारे आत्मविश्वास के साथ चलने लगी हैं।
चांदनी के साथ हादसा उस समय हुआ था, जब वह अपने चाचा के साथ ट्रेन में चढ़ रही थीं। संतुलन बिगड़ने से वह ट्रेन के नीचे आ गईं और घुटनों तक दोनों पैर कट गए। इलाज के बाद जान तो बच गई, लेकिन अगले 14 वर्षों तक वह दूसरों पर निर्भर रहीं।
करीब एक माह पहले परिवार उन्हें नारायण सेवा संस्थान लेकर पहुंचा। यहां विशेषज्ञों ने उनके लिए ‘नारायण मॉड्यूलर आर्टिफिशियल लिम्ब’ तैयार किए और प्रशिक्षण दिया। नियमित अभ्यास के बाद चांदनी अब न केवल चलने लगी हैं, बल्कि अपने अधिकांश दैनिक कार्य भी स्वयं कर रही हैं। उनकी यह वापसी दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा और आधुनिक तकनीक की उपयोगिता का सशक्त उदाहरण बन गई है।