सीएमएचओ रिपोर्ट के बाद डीटीओ ने किया एक्शन, मामला पहुंचा जयपुर मुख्यालय तक
उदयपुर, 13 अप्रैल: स्वास्थ्य विभाग में अनुशासनहीनता और नियमों की अनदेखी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें निलंबन से बहाल एक डॉक्टर द्वारा खुद ही जॉइनिंग लेटर तैयार कर अधिकारियों को भेजने का आरोप है। मामले के सामने आते ही विभाग में हड़कंप मच गया और जिला स्तर से लेकर जयपुर मुख्यालय तक जांच शुरू हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार संबंधित डॉक्टर को 30 मार्च 2026 को एक पत्र के जरिए बहाल किया गया था। निर्देश स्पष्ट थे कि उन्हें अपनी उपस्थिति (जॉइनिंग) जयपुर स्थित मुख्यालय के एटीसी शाखा में देनी होगी। लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने नियमों को दरकिनार करते हुए सीधे उदयपुर में ही जॉइनिंग दर्शा दी।
खुद बनाया जॉइनिंग लेटर, अफसरों को भेजा मेल
विभागीय जांच में सामने आया कि डॉक्टर ने बिना किसी अधिकृत आदेश के न केवल जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी की, बल्कि सरकारी लेटरहेड और ईमेल का उपयोग करते हुए संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना भी भेज दी। इसे सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग और अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जा रहा है।
डीटीओ ने तुरंत लिया एक्शन
मामला जिला क्षय अधिकारी (डीटीओ) के संज्ञान में आते ही 26 मार्च 2026 को कार्रवाई करते हुए इस जॉइनिंग को निरस्त कर दिया गया। डीटीओ ने स्पष्ट किया कि बिना सक्षम अनुमति के की गई जॉइनिंग पूरी तरह नियम विरुद्ध है।
सीएमएचओ की रिपोर्ट जयपुर भेजी गई
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट बनाकर निदेशालय, जयपुर को भेज दी है। रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेजों और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग को गंभीर अनियमितता बताया गया है। वहीं, संबंधित डॉक्टर का कहना है कि उन्हें जॉइनिंग निरस्त होने की कोई जानकारी नहीं है और वे नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जॉइनिंग निरस्त करने का अधिकार डीटीओ को नहीं है।
आगे की कार्रवाई तय करेगी दिशा
अब इस मामले में अंतिम निर्णय जयपुर मुख्यालय स्तर पर लिया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है।