मेवाड़ यूनिवर्सिटी के 10 हजार छात्रों के भविष्य पर सवाल

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मान्यता, फर्जी डिग्री और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच के बीच सरकार ने नए प्रवेश पर भी लगाई रोक
उदयपुर, 3 जून:
चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नए प्रवेशों पर रोक लगने के बाद हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। दस हजार से अधिक विद्यार्थियों वाले इस निजी विश्वविद्यालय पर पहले से ही कुछ पाठ्यक्रमों की मान्यता, फर्जी डिग्री प्रकरण और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब राजस्थान सरकार ने जांच पूरी होने तक सभी नए प्रवेशों पर रोक लगाकर मामले को और गंभीर बना दिया है।
जांच रिपोर्ट के बाद सरकार का कदम
विश्वविद्यालय के खिलाफ लंबे समय से फर्जी डिग्री जारी करने और अन्य अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद उदयपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। रिपोर्ट में सामने आई कथित अनियमितताओं के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी अधिनियम-2009 की धारा 44(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया। विश्वविद्यालय अपना जवाब दे चुका है, लेकिन विभाग अभी उसकी समीक्षा कर रहा है।
नर्सिंग कोर्स को लेकर भी उठा था विवाद
इसी वर्ष बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों ने आरोप लगाया था कि जिस पाठ्यक्रम में उन्हें प्रवेश दिया गया, उसे राजस्थान नर्सिंग काउंसिल और इंडियन नर्सिंग काउंसिल से आवश्यक मान्यता प्राप्त नहीं थी। इस विवाद के बाद छात्रों ने आंदोलन किया और मामला पुलिस तक पहुंचा। इससे विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े हुए।
एसओजी जांच और हाईकोर्ट की तैयारी
फर्जी डिग्री मामले में एसओजी द्वारा कुछ पूर्व पदाधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ा है। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय के चेयरमैन अशोक गदिया ने सरकार के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि संस्थान के खिलाफ कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है। उनका दावा है कि यदि किसी व्यक्ति ने निजी स्तर पर गलत कार्य किया है तो उसके लिए विश्वविद्यालय जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि प्रवेश प्रतिबंध के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।