नारायण सेवा संस्थान की शिव कथा में शिव-सती संवाद का किया भावपूर्ण वर्णन, दिव्यांगजनों से भी किया आत्मीय संवाद
उदयपुर, 4 अगस्त: नारायण सेवा संस्थान में श्रावण मास के अवसर पर आयोजित शिव कथा श्रृंखला में संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने शिव-सती विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि त्याग, भक्ति, संत सेवा और निस्वार्थ भाव ही मोक्ष का सच्चा मार्ग हैं। उन्होंने कहा कि माता सती ने राजसी वैभव छोड़कर भगवान शिव के तप, सादगी और आध्यात्मिक जीवन को अपनाया, क्योंकि उनके लिए सबसे बड़ा सुख शिव का सान्निध्य था।
प्रशांत अग्रवाल ने शिव-सती संवाद का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान शिव ने धर्म, योग, ज्ञान, वैराग्य और संत सेवा को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि अहंकार और मोह का त्याग कर सेवा, साधना और भक्ति को जीवन का आधार बनाने से आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। उन्होंने उपकार को स्मरण रखना और जरूरतमंदों की सहायता करना ही सच्ची मानवता बताया।
कथा के दौरान अग्रवाल ने संस्थान में उपचार एवं पुनर्वास सेवाएं प्राप्त कर रहे दिव्यांगजनों और उनके परिजनों से भी आत्मीय संवाद किया। उन्होंने उपचार से पहले की कठिनाइयों और कृत्रिम अंग मिलने के बाद जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की जानकारी ली। लाभार्थियों ने बताया कि संस्थान की सेवाओं से उनके जीवन में नया आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति नई उम्मीद जगी है।