जीवमात्र की रक्षा का संकल्प ही रक्षाबंधन की सच्ची भावनाःडॉ. सुरेन्द्र मुनि

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उदयपुर। देवेन्द्र धाम में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने रक्षाबंधन पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इंसान अपनी रक्षा चाहता है, लेकिन दूसरों को नुकसान पहुंचाकर स्वयं सुरक्षित रहना संभव नहीं है। इसलिए रक्षाबंधन का वास्तविक संदेश केवल अपने संरक्षण तक सीमित न रहकर जीवमात्र की रक्षा और कल्याण का संकल्प लेना है।
उन्होंने कहा कि हमें दूसरों के लिए अच्छे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। यदि हम किसी के लिए अच्छे शब्दों का प्रयोग करते हैं तो सामने वाला भी हमारे लिए अच्छे भाव रखता है। वहीं कटु व अपमानजनक शब्द रिश्तों में दूरी पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में परस्पर सहयोग, प्रेम और सद्भावना का भाव होना आवश्यक है।
प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को दूसरों के प्रति संवेदनशील रहते हुए उनके सुख-दुख को समझने का प्रयास करना चाहिए। किसी को कष्ट देकर स्वयं सुख प्राप्त करने की भावना उचित नहीं है। जीवमात्र के प्रति दया और करुणा रखना ही सच्ची मानवता है।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए जीवों की रक्षा, अहिंसा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का संकल्प दिलाया। धर्मसभा में संतों के विचारों से श्रद्धालु लाभान्वित हुए।

संग्रह की सीमा नहीं, त्याग में ही आत्मा का सच्चा आनंदःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
उदयपुर।
वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि मनुष्य अनादिकाल से आसक्ति और कर्मों के बंधन में उलझा हुआ है। तपस्या के माध्यम से कर्मों का क्षय कर आत्मा को निर्मल बनाया जा सकता है। जब कर्मों का आवरण हटता है, तभी आत्मा को उस आनंद की अनुभूति होती है, जो संसार की किसी भी वस्तु से प्राप्त नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की इच्छाओं और संग्रह की कोई सीमा नहीं है। अधिक से अधिक पाने की चाह में व्यक्ति कितना ही धन और साम्राज्य क्यों न जुटा ले, मन में ‘और चाहिए’ की भावना बनी रहती है। पदार्थों और परिग्रह का बोझ बढ़ाने से जीवन सुखी नहीं होता। व्यक्ति त्याग के लिए उचित समय का इंतजार करता रहता है, लेकिन वह समय कभी नहीं आता।
साध्वीश्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं तय करना होगा कि वह जीवन में संग्रह करने वाला बनना चाहता है या त्याग करने वाला। लोभ की स्थिति ऐसी नहीं होनी चाहिए कि व्यक्ति स्वयं भी संसाधनों का उपयोग न कर सके और जरूरतमंदों के साथ बांटने में भी कमी पड़ने का भय महसूस करे। उन्होंने श्रेणिक राजा के प्रसंग के माध्यम से परोपकार और सेवा भावना का महत्व समझाया।
उन्होंने कहा कि संतों की वाणी सुनानंे का उद्देश्य यही है कि यदि एक व्यक्ति भी सम्यक ज्ञान प्राप्त कर अपने जीवन की दिशा बदल ले तो संतों का आगमन सार्थक हो जाता है। संयम का वास्तविक आनंद केवल सुनने या जानने से नहीं, बल्कि उसे जीवन में अपनाने से अनुभव किया जा सकता है। इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्तिमय गीत प्रस्तुत किया।

शिक्षक सम्मान की नई मिसालः 100 प्रतिभाशाली शिक्षकों को मिलेगा ‘टीचर्स ट्रिब्यूट-2026’ सम्मान
उदयपुर।
रोटरी क्लब उद्यम की ओर से शिक्षकों के समर्पण और प्रतिभा को सम्मान देने के लिए लगातार दूसरे वर्ष ‘टीचर्स ट्रिब्यूट-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 100 बहुमुखी प्रतिभावान शिक्षकों का चयन कर उन्हें 11 सितंबर 2026 को आयोजित विशेष समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन रोटरी क्लब उद्यम के अध्यक्ष देवेंद्र चौधरी की मौजूदगी में सरवर जी वारसी, डॉ. गजेंद्र जोशी एवं कुलदीप सिंह ने किया। पोस्टर विमोचन के साथ ही शिक्षकों के नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अब तक 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। नामांकन की अंतिम तिथि 3 सितंबर रखी गई है।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्राप्त आवेदनों की चयन समिति द्वारा समीक्षा की जाएगी और निर्धारित मापदंडों के आधार पर 100 शिक्षकों का चयन किया जाएगा। सम्मान के लिए सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के साथ प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठनों (छळव्) से जुड़े शिक्षकों को भी अवसर दिया जाएगा।
आयोजन को सफल बनाने में कार्यक्रम अध्यक्ष अभिषेक सेठ, डॉ. योगेश पारीक, सरबिक दास कश्यप, वैभव शर्मा, जूली मर्मत, सचिव डॉ. सुरभि गांधी एवं कोषाध्यक्ष प्रखर सीयल सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
रोटरी क्लब उद्यम की यह पहल उन शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का प्रयास है, जो अपने ज्ञान, प्रतिभा और समर्पण से विद्यार्थियों का भविष्य संवारने के साथ समाज निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

61 वृक्षों से गुरु माँ को जन्मोत्सव की अनूठी भेंट, रक्षाबंधन पूर्णिमा पर 108 सर्वाैषधि कलशों से होगा महाभिषेक
उदयपुर।
गुरु माँ 105 श्री सुप्रकाश मति माताजी के 61वें जन्मोत्सव के पूर्व ध्यानोदय तीर्थ, बलीचा में रक्षाबंधन पूर्णिमा पर धर्म और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा आयोजन होगा। इस अवसर पर 61 वृक्षों का रोपण कर उन्हें गुरु माँ के जन्मोत्सव की मंगल भेंट के रूप में समर्पित किया जाएगा। साथ ही 108 सर्वाैषधि कलशों से भव्य महाभिषेक भी होगा।
ओमप्रकाश गोदावत ने बताया कि 61 वृक्षों का रोपण गुरु-भक्ति के साथ प्रकृति संरक्षण और जीव-दया का संदेश देगा। गुरु माँ के 61वें जन्मोत्सव से पूर्व 61 वृक्षों को समर्पित करने की यह पहल जैन समाज में अपने प्रकार का विशेष आयोजन है। इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
वहीं रक्षाबंधन पूर्णिमा पर 108 सर्वाैषधि कलशों से महाभिषेक का आयोजन धार्मिक विधि-विधान के साथ होगा। जैन परंपरा में रक्षाबंधन पर्व भगवान विष्णुकुमार मुनिराज द्वारा 108 मुनिराजों की उपसर्ग से रक्षा किए जाने की पावन घटना से जुड़ा माना जाता है। इसी स्मृति में होने वाला यह महाभिषेक श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यार्जन का अवसर रहेगा।
आयोजकों ने बताया कि महाभिषेक में श्रद्धालु मंगल भावना, जीव कल्याण और विश्व शांति की कामना के साथ सहभागी बनेंगे। आयोजन में बड़ी संख्या में समाजजनों एवं श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ध्यानोदय तीर्थ, बलीचा में होने वाला यह आयोजन गुरु-भक्ति, धर्म, जीव-दया और पर्यावरण संरक्षण को एक सूत्र में पिरोने वाला विशेष अवसर होगा।