कोटड़ा में 18 साल बाद भी अधूरी प्रक्रिया, लंबित दावों के निस्तारण की उठी मांग
उदयपुर/कोटड़ा, 11 अप्रैल: उदयपुर जिले में हजारों आदिवासी परिवार आज भी वन अधिकार कानून के लाभ से वंचित हैं। वर्षों से वन भूमि पर निवास और खेती करने के बावजूद उन्हें अधिकार पत्र नहीं मिल पा रहे, जिससे उनकी आजीविका और सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से कोटड़ा क्षेत्र में स्थिति गंभीर है, जहां 18 वर्ष बाद भी बड़ी संख्या में दावे लंबित हैं।
जानकारी के अनुसार कोटड़ा में करीब 2300 व्यक्तिगत और 77 गांवों में सामुदायिक वन अधिकार पत्र जारी हुए हैं, लेकिन पिछले तीन वर्षों से पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी है। अभी भी 1350 से अधिक व्यक्तिगत दावे लंबित हैं, जबकि कई फाइलें पंचायत और वन विभाग में अटकी हुई हैं।
जीपीएस और सत्यापन बना रोड़ा
आदिवासी विकास मंच के अनुसार करीब 350 दावे जीपीएस और भौतिक सत्यापन के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रहे। वहीं उपखंड स्तरीय वन अधिकार समिति की बैठक दो वर्षों से नहीं होने के कारण एक भी मामला जिला स्तर तक नहीं पहुंच पाया। समस्या को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। मंच ने सभी दावों को ऑनलाइन करने, प्रक्रिया तेज करने और सामुदायिक अधिकार पत्र जारी करने की मांग की।
योजनाओं का लाभ भी अटका: वन अधिकार पत्र मिलने के बाद भी कई किसानों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुए हैं, जिससे वे केंद्र सरकार की योजनाओं से वंचित रह रहे हैं।