भाजपा में टिकट को लेकर खींचतान, कांग्रेस में भी पैराशूट उम्मीदवारों पर बवाल

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नामांकन के अंतिम दिन दोनों प्रमुख दलों के सामने असंतोष थामने की चुनौती; वार्ड 22 में हिदायतुल्लाह के टिकट का उमर फारूक ने किया विरोध
उदयपुर, 30 अगस्त:
उदयपुर नगर निगम चुनाव में नामांकन की अंतिम तारीख से ठीक पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों में टिकट वितरण को लेकर असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं। भाजपा अभी तक अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची को लेकर असमंजस में है, वहीं कांग्रेस में प्रत्याशियों की घोषणा के बाद कई वार्डों में कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई है। कांग्रेस में खासतौर पर बाहरी अथवा ‘पैराशूट उम्मीदवारों’ को टिकट दिए जाने को लेकर स्थानीय दावेदारों में रोष है। ऐसे में सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन दोनों दलों के लिए डैमेज कंट्रोल की परीक्षा माना जा रहा है।
वार्ड 22 में हिदायतुल्लाह के टिकट पर विरोध
कांग्रेस में सबसे ज्यादा विवाद वार्ड नंबर 22 को लेकर सामने आया है। पार्टी ने यहां पूर्व पार्षद हिदायतुल्लाह को प्रत्याशी बनाया है। उनके नाम की घोषणा के बाद टिकट के मजबूत दावेदार उमर फारूक और उनके समर्थकों में नाराजगी सामने आई। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि वार्ड में लंबे समय से सक्रिय दावेदारों की अनदेखी कर बाहरी उम्मीदवार को टिकट देना पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
गहलोत से मिले उमर फारूक
हिदायतुल्लाह को टिकट दिए जाने के विरोध में उमर फारूक अपने समर्थकों के साथ उदयपुर दौरे पर आए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिले। उन्होंने प्रत्याशी चयन को लेकर गहलोत को लिखित शिकायत भी सौंपी और वार्ड 22 में उम्मीदवार के चयन पर पुनर्विचार की मांग की। फारूक ने पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया कि स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावनाओं और वार्ड की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए प्रत्याशी चयन पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि यदि निर्णय नहीं बदला गया तो चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
भाजपा में भी विद्रोह की आशंका
दूसरी ओर भाजपा के सामने भी टिकट वितरण को लेकर चुनौती कम नहीं है। पार्टी ने रविवार तक 80 वार्डों के अधिकृत प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक नहीं की, जबकि सोमवार दोपहर 3 बजे नामांकन की समय-सीमा समाप्त हो जाएगी। टिकट के कई दावेदारों के निर्दलीय नामांकन की तैयारी करने की चर्चा है। भाजपा ने सोमवार सुबह 9:30 बजे टाउनहॉल से कलेक्ट्रेट तक नामांकन रैली निकालने का कार्यक्रम तय किया है। पार्टी लगातार सातवां बोर्ड बनाने के दावे के साथ चुनाव मैदान में है, लेकिन टिकट वितरण से उपजे असंतोष और संभावित बगावत को थामना नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती है।
अंतिम दिन तय होगी तस्वीर
नगर निगम के 80 वार्डों में दोनों दलों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में संगठन को एकजुट रखने की है। सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन न केवल प्रत्याशियों की तस्वीर साफ होगी, बल्कि यह भी सामने आएगा कि टिकट से नाराज दावेदार पार्टी के फैसले के साथ खड़े होते हैं या निर्दलीय मैदान में उतरकर चुनावी समीकरण बदलते हैं।