उदयपुर स्थापना दिवस शहर के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है : डॉ. महावर

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महाराणा उदयसिंह की दूरदर्शिता से बसा उदयपुर आज विश्व पर्यटन मानचित्र पर विशेष पहचान बना चुका है
उदयपुर, 19 अप्रैल:
जनमत मंच की ओर से अक्षय तृतीया के अवसर पर उदयपुर स्थापना दिवस मनाते हुए मेवाड़ के संस्थापक महाराणा उदयसिंह द्वितीय को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस अवसर पर मंच अध्यक्ष डॉ. श्रीनिवास महावर ने कहा कि उदयपुर स्थापना दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि मेवाड़ की दूरदर्शिता, संघर्ष और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है।
डॉ. महावर ने बताया कि चित्तौड़गढ़ पर मुगलों के लगातार आक्रमणों के बाद सुरक्षित राजधानी की तलाश में महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने अरावली पर्वतमाला की गोद में स्थित गिर्वा घाटी और पिछोला झील के किनारे उदयपुर नगर की स्थापना की थी। यही निर्णय आगे चलकर मेवाड़ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
उन्होंने कहा कि उदयपुर स्थापना दिवस हर वर्ष अक्षय तृतीया पर उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। इस अवसर पर शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, शोभायात्राएं और विभिन्न आयोजन होते हैं, जिनके माध्यम से शहर की समृद्ध विरासत और इतिहास को स्मरण किया जाता है।
डॉ. महावर ने बताया कि शहर की सुरक्षा के लिए छह किलोमीटर लंबी परकोटा दीवार बनाई गई थी, जिसमें सूरजपोल, चांदपोल, उदयपोल, हाथीपोल, अंबापोल, ब्रह्मपोल और दिल्ली गेट जैसे सात प्रमुख द्वार स्थापित किए गए थे। यह संरचना उस समय की सुरक्षा व्यवस्था और स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर, डॉ. प्रियदर्शी ओझा, विशाल मथुर एवं विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि महाराणा उदयसिंह द्वारा स्थापित उदयपुर आज राजसी रियासत से विकसित होकर आधुनिक और पर्यटन-केंद्रित शहर बन चुका है। झीलों और महलों की नगरी उदयपुर आज देश-विदेश में ‘सिटी ऑफ लेक्स’ और ‘वेनिस ऑफ द ईस्ट’ के नाम से प्रसिद्ध है।
उन्होंने कहा कि उदयपुर ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए पर्यटन, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ऐतिहासिक आकर्षण और आधुनिक सुविधाओं का यह अनूठा संगम ही उदयपुर को वैश्विक पहचान दिला रहा है।