विद्यार्थियों की प्रतिभा ने रचा संस्कार और संस्कृति का स्वर
संस्कृत दिवस पर संस्कृत भारती की श्लोक प्रतियोगिता में कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लिया भाग
उदयपुर, 31 अगस्त: संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में संस्कृतभारती द्वारा आयोजित संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आज महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल में आयोजित श्लोक प्रतियोगिता ने उदयपुर की धरती को संस्कृत के मधुर स्वरों से गुंजायमान कर दिया। संस्कृत श्लोकों के सस्वर, शुद्ध और भावपूर्ण उच्चारण से वातावरण मानो भारतीय ज्ञान, संस्कार और संस्कृति की प्राचीन परंपरा के जीवंत स्पंदन से भर उठा।
कार्यक्रम संयोजक हेमंत कुमार जैन ने बताया कि प्रतियोगिता में कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी स्मरणशक्ति, उच्चारण-कौशल, स्वर-लय और भावाभिव्यक्ति का प्रभावी परिचय दिया। मंच पर एक के बाद एक गूंजते संस्कृत श्लोकों ने न केवल श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर संस्कृत के प्रति अनुराग, आत्मविश्वास और मंचीय प्रतिभा की उजली आभा को भी अभिव्यक्त किया।
उदयपुर के विभिन्न प्रतिष्ठित विद्यालयों से आए विद्यार्थियों की सहभागिता ने इस आयोजन को व्यापक आयाम प्रदान किया। विद्यार्थियों के कंठ से प्रस्फुटित संस्कृत श्लोकों की मधुर गूंज ने भारतीय ज्ञान-परंपरा और संस्कारों की गौरवशाली विरासत को मानो वर्तमान की धरती पर पुनर्जीवित कर दिया। अनेक प्रतिभागियों ने श्लोकों के अर्थ एवं भाव को भी अपनी प्रस्तुति में प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया, जिससे प्रस्तुतियां केवल स्मरण और उच्चारण तक सीमित न रहकर भाव-संप्रेषण का सुंदर माध्यम बन गईं।
कार्यक्रम में संभागीय संस्कृत शिक्षा अधिकारी, उदयपुर संभाग डॉ. भगवती शंकर व्यास एवं महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल की प्रधानाध्यापिका डॉ. राखी त्रिवेदी अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अतिथियों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान एवं संस्कृति की आधारभूत भाषा है तथा ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में भारत आत्मा पुरस्कार संयोजक, धरोहर संस्था, उदयपुर से योगेश पालीवाल तथा मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य मुरलीधर पालीवाल ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। निर्णायकों ने उच्चारण की शुद्धता, स्वर, लय, स्मरण, भाव एवं प्रस्तुतीकरण को आधार बनाकर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया।
प्रतियोगिता में उदयपुर के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने कनिष्ठ एवं वरिष्ठ दोनों वर्गों में सहभागिता की। विद्यालयों की इस व्यापक भागीदारी ने संस्कृत भारती द्वारा संस्कृत को विद्यालयों और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास को एक सशक्त और व्यापक स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम के आयोजन में महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल के निदेशक एस.के. शर्मा के मार्गदर्शन एवं सहयोग का विशेष आभार व्यक्त किया गया।
29 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने लिया भाग
कनिष्ठ वर्ग में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इनमें सेंट एन्थोनीज़ विद्यालय सेक्टर-4, विट्टी इंटरनेशनल विद्यालय, सेंट एंथोनी सीनियर सेकेंडरी स्कूल गोवर्धन विलास, नीरजा मोदी स्कूल, हैप्पी होम सीनियर सेकेंडरी स्कूल, केंद्रीय अकादमी हिरण मगरी सेक्टर-3, शिशु भारती सीनियर सेकेंडरी स्कूल, महावीर अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, आलोक संस्थान हिरण मगरी सेक्टर-11, सेंट्रल एकेडमी स्कूल हिरण मगरी सेक्टर-5, आलोक माध्यमिक विद्यालय पंचवटी, सीडलिंग मॉडर्न पब्लिक स्कूल, महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल, आलोक सीनियर सेकेंडरी स्कूल फतेहपुरा, माउंट लिट्रा ज़ी स्कूल, द स्कॉलर्स एरिना इंग्लिश मीडियम स्कूल आर.के. पुरम, गुरु नानक पब्लिक सी.से. स्कूल, अभिनव उच्च माध्यमिक विद्यालय गायरियावास, मिरांडा उच्च माध्यमिक विद्यालय, महाराणा मेवाड़ विद्या मंदिर अंबामाता, रॉयल इंटरनेशनल स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल उदयपुर, रॉकवुड्स हाई स्कूल, सेंट्रल एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल अंबामाता तथा सेंट्रल एकेडमी सी.से. स्कूल सरदारपुरा सहित अनेक विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
मंच पर विद्यार्थियों ने श्लोकों का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण करते हुए वातावरण को भक्तिभाव, संस्कार और भारतीय ज्ञान-परंपरा के रंग में रंग दिया। उनकी सधी हुई वाणी, शुद्ध उच्चारण, स्वर-लय और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने यह अनुभव कराया कि संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के कंठ में आज भी उतनी ही जीवंत और स्पंदित है। इस अवसर पर संस्कृत भारती की ओर से दुष्यंत कुमार नागदा, डॉ. यज्ञ आमेटा, श्रीयांश कंसारा, चैन शंकर दशोरा , गौरव साहू, डॉ. रेनू पालीवाल, मीनाक्षी द्विवेदी, भूपेंद्र कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।