तीन दशक में बदला उदयपुर का पर्यावरण: झीलों पर दबाव, बढ़ा तापमान और सिमटी हरियाली

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तेजी से बढ़ा शहर, बदला भू-उपयोग
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 4 जून
: झीलों, पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध उदयपुर पिछले तीन दशकों में बड़े पर्यावरणीय बदलावों का साक्षी बना है। बढ़ती जनसंख्या, तेज शहरीकरण, पर्यटन विस्तार और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब शहर के प्राकृतिक स्वरूप पर स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं।
विभिन्न अध्ययनों के अनुसार वर्ष 1995 से 2017 के बीच उदयपुर का निर्मित (बिल्ट-अप) क्षेत्र 23.85 प्रतिशत से बढ़कर 34.60 प्रतिशत तक पहुंच गया। शहर के विस्तार के साथ नए आवासीय क्षेत्र, होटल, सड़कें और व्यावसायिक परिसर विकसित हुए, जिससे खुले और प्राकृतिक क्षेत्रों का दायरा लगातार घटा है।
उदयपुर की पहचान मानी जाने वाली फतेहसागर, पिछोला, उदयसागर और स्वरूप सागर झीलों पर भी दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार झीलों के कैचमेंट क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों, अतिक्रमण, मिट्टी कटाव और शहरी अपशिष्ट के कारण जल निकायों की पारिस्थितिकी प्रभावित हुई है। इससे वर्षा जल के प्राकृतिक प्रवाह और झीलों के पुनर्भरण पर असर पड़ा है।
बढ़ते तापमान ने बदला मौसम का मिजाज
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। हाल के वर्षों में शहर का तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक पहुंच चुका है। वर्ष 2016 में 46.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था। विशेषज्ञ इसके पीछे बढ़ते शहरीकरण और “हीट आइलैंड इफेक्ट” को भी जिम्मेदार मानते हैं। वहीं वर्षा का स्वरूप भी बदला है, जहां अब कम दिनों में अधिक बारिश और लंबे सूखे अंतराल देखने को मिलते हैं।
वाहनों और प्रदूषण का बढ़ा दबाव
1990 के दशक की तुलना में उदयपुर में वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। इसके साथ ही वायु और ध्वनि प्रदूषण में भी वृद्धि दर्ज की गई है। प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर धूल और धुएं का स्तर पहले की तुलना में अधिक महसूस किया जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सार्वजनिक परिवहन और हरित परिवहन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
फिर भी उम्मीद बाकी है
हालांकि सकारात्मक पक्ष यह है कि उदयपुर आज भी राजस्थान के सर्वाधिक वनाच्छादित जिलों में गिना जाता है तथा पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाए गए हैं। जिला पर्यावरण योजना के अनुसार पिछले एक दशक में हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण किया गया है। शहर को हाल ही में रामसर वेटलैंड सिटी मान्यता मिलने से झील संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा मिली है।
भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती
पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि झीलों के कैचमेंट क्षेत्र सुरक्षित रखे जाएं, अनियोजित निर्माण पर नियंत्रण हो, हरित क्षेत्रों का विस्तार किया जाए और नागरिक पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभाएं, तो उदयपुर अपनी प्राकृतिक पहचान को सुरक्षित रख सकता है। अन्यथा झीलों और पहाड़ियों का यह शहर आने वाले वर्षों में गंभीर पर्यावरणीय दबावों का सामना कर सकता है।