2045 तक नहीं सूखेंगी उदयपुर की झीलें: कटारिया

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देवास-III और IV परियोजना का निरीक्षण; बोले—2028 तक काम पूरा होने की उम्मीद, 2029 से झीलों में पहुंचेगा पानी
उदयपुर, 4 जुलाई
: उदयपुर की जीवनरेखा मानी जाने वाली झीलों को आने वाले दो दशकों तक पानी की कमी से राहत मिलने की उम्मीद है। पंजाब के राज्यपाल एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने शनिवार को देवास-III एवं देवास-IV पेयजल परियोजना का निरीक्षण करते हुए दावा किया कि परियोजना पूरी होने के बाद वर्ष 2045 तक उदयपुर की झीलों के खाली होने की नौबत नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि करीब 1690 करोड़ रुपये की यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्ष 2028 तक पूरी होने की संभावना है और 2029 से इसका पानी उदयपुर की झीलों तक पहुंचना शुरू हो जाएगा।
कटारिया ने अधिकारियों के साथ गोगुंदा क्षेत्र के उंडीथल में निर्माणाधीन टनल और नाल गांव में बन रहे बांध का निरीक्षण कर कार्य प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि देवास परियोजना केवल पेयजल योजना नहीं, बल्कि उदयपुर के भविष्य, पर्यटन, पर्यावरण और जल सुरक्षा से जुड़ा दीर्घकालिक समाधान है। इसके पूरा होने से पिछोला, फतहसागर और स्वरूप सागर जैसी झीलों का जलस्तर लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा।
वन स्वीकृति में आई बाधा, अब तेजी से बढ़ रहा काम
राज्यपाल ने बताया कि परियोजना के निर्माण में वन स्वीकृति सबसे बड़ी चुनौती रही। फरवरी 2024 से जून 2026 तक लगातार प्रयासों के बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के हस्तक्षेप से मंजूरी मिल सकी और कार्य ने गति पकड़ी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सुरंग की प्रतिदिन लगभग सात मीटर खुदाई हो रही है तथा निर्माण एजेंसी का लक्ष्य प्रति माह करीब 700 मीटर खुदाई का है।

20 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखकर बनी योजना

कटारिया ने कहा कि यह परियोजना उदयपुर की आगामी लगभग 20 वर्षों की पेयजल आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। गर्मियों में झीलों के जलस्तर को बनाए रखने के लिए देवास बांध का पानी छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि झीलों को इस प्रकार संरक्षित रखने की व्यवस्था पूरे राजस्थान में केवल उदयपुर में ही उपलब्ध है। इस परियोजना का लाभ उदयपुर के साथ-साथ चित्तौड़गढ़ और बीसलपुर क्षेत्र तक भी पहुंचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि देवास परियोजना पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया के अधूरे सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों एवं सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति और तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।