चार दिन में चार प्रसूताओं की मौत से हड़कंप, जांच के घेरे में अस्पताल

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परिजनों का आरोप- बिना पोस्टमॉर्टम शव सौंपा, मंगवाया गया खून चढ़ाया ही नहीं; प्रशासन ने बनाई जांच समिति
बांसवाड़ा, 11 जुलाई:
बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में चार दिनों के भीतर चार प्रसूताओं की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सभी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। एक मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर मामला दबाने, बिना पोस्टमॉर्टम शव सौंपने और मंगवाए गए खून को नहीं चढ़ाने का आरोप लगाया है।
जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव ने बताया कि मृतकों में लक्ष्मी (21), लीला (32), रेशमा (28) और एक अन्य प्रसूता शामिल हैं। इनमें से दो महिलाओं को गंभीर हालत में अन्य केंद्रों से रेफर किया गया था, जबकि दो का अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन किया गया था। मौतों के कारणों की जांच के लिए पांच वरिष्ठ चिकित्सकों की विशेष समिति गठित की गई है। ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की आशंका को देखते हुए सैंपल लिए गए हैं तथा दवाओं के संभावित रिएक्शन, एनेस्थेटिस्ट की रिपोर्ट और पूरी मेडिकल हिस्ट्री की भी जांच की जा रही है।
भीलवाड़ा महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक ने कहा कि सभी प्रसूताएं गंभीर हालत में थीं और चिकित्सकों ने उन्हें रेफर किए बिना बचाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्होंने बताया कि एक प्रसूता को हार्ट अटैक भी आया था।
मृतका लीला के जेठ संजय खांट ने आरोप लगाया कि डिलीवरी के बाद लीला पूरी तरह स्वस्थ थी और रात तक परिजनों से बातचीत कर रही थी। सुबह अचानक अस्पताल ने उसका ब्लड प्रेशर गिरने और बेहोश होने की सूचना दी तथा उसे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। उन्होंने दावा किया कि लीला का हीमोग्लोबिन सामान्य था, इसके बावजूद चार यूनिट खून मंगवाया गया, लेकिन उसे चढ़ाया नहीं गया और कुछ देर बाद मृत घोषित कर दिया गया।
परिजनों का यह भी आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने पोस्टमॉर्टम नहीं कराने के लिए लिखित सहमति लेकर बिना पोस्टमॉर्टम शव सौंप दिया। कलेक्टर ने कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गुमराह करने की बात सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।