कमजोर मानसून के बीच जल प्रबंधन पर उठे सवाल, सिर्फ उदयपुर शहर नहीं पूरे संभाग के लिए चाहिए दीर्घकालिक योजना
अभी तक सामान्य से 25 प्रतिशत कम बारिश
उदयपुर, 5 अगस्त: मानसून के इस सीजन में अब तक उदयपुर जिले में औसतन करीब 380 मिमी वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से लगभग 25 प्रतिशत कम है। जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन वर्षा का घाटा अभी पूरी तरह नहीं भर पाया है। ऐसे में राज्य सरकार ने जरूरत पड़ने पर देवास परियोजना से पानी छोड़कर पिछोला और फतेहसागर झीलों को भरने की तैयारी की है, ताकि शहर की पेयजल आपूर्ति और पर्यटन गतिविधियों पर असर न पड़े। इससे पहले भी गर्मियों में देवास परियोजना के बांधों से पानी छोड़कर इन झीलों का जलस्तर बढ़ाया जाता रहा है।
लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है। यदि मानसून सामान्य नहीं रहा और झीलें देवास के पानी से लबालब कर भी दी गईं, तो उदयपुर संभाग के अन्य बांधों, तालाबों, एनीकटों और ग्रामीण जलाशयों का क्या होगा? मेवाड़ के हजारों गांवों की पेयजल व्यवस्था, सिंचाई और भूजल पुनर्भरण तो स्थानीय वर्षा पर ही निर्भर है। देवास परियोजना का पानी मुख्य रूप से उदयपुर शहर की जलापूर्ति के लिए है; यह पूरे संभाग के जल संकट का समाधान नहीं बन सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगस्त में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो राजसमंद, सलूम्बर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ सहित मेवाड़ के कई क्षेत्रों में जलाशयों का भराव प्रभावित हो सकता है। इसका असर रबी फसलों, भूजल स्तर और ग्रामीण पेयजल योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
असली चुनौती सिर्फ झीलें भरना नहीं
उदयपुर की पहचान पिछोला और फतेहसागर झीलों से है, इसलिए उनका भरना जरूरी है। लेकिन जल विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ शहर की झीलों को भर देना पर्याप्त नहीं होगा। यदि पूरे संभाग के बांध, तालाब और भूजल स्रोत नहीं भरते हैं तो आने वाले महीनों में ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट गहरा सकता है। इसलिए जरूरत ऐसी जल प्रबंधन नीति की है जो केवल पर्यटन और शहरी पेयजल तक सीमित न रहकर पूरे मेवाड़ के जल संसाधनों को ध्यान में रखे।
पिछले वर्षों की तुलना
वर्ष 1 जून–5 अगस्त तक वर्षा (लगभग) स्थिति
2026 380 मिमी सामान्य से 25% कम
2025 530 मिमी सामान्य से अधिक
2024 445 मिमी सामान्य के आसपास
2023 690 मिमी सामान्य से काफी अधिक