चालीस डिग्री तापमान में भी नंगे पांव न्याय की राह पर यश

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पिता के हत्यारों को फांसी दिलाने के संकल्प के साथ छोड़ दिए थे चप्पल—जूते पहनना
कन्हैयालाल साहू हत्याकांड में धीमी न्यायिक प्रक्रिया से पीड़ित परिवार व्यथित
उदयपुर, 25 अप्रैल:
उदयपुर की तपती सड़कों पर इन दिनों तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। भीषण गर्मी में जहां लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं, वहीं एक युवक पिछले चार वर्षों से नंगे पांव जलती सड़क पर चल रहा है। उसके पैरों में पड़े छाले अब कठोर खाल में बदल चुके हैं, लेकिन उसका संकल्प अब भी अडिग है। यह युवक है यश साहू, जिसने अपने पिता कन्हैयालाल साहू की निर्मम हत्या के बाद न्याय मिलने तक जूते-चप्पल नहीं पहनने का प्रण लिया है।
28 जून 2022 को हुई इस जघन्य हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। घटना के बाद जहां देशभर में आक्रोश था, वहीं पीड़ित परिवार आज भी न्याय की अंतिम उम्मीद में इंतजार कर रहा है। यश का यह त्याग किसी धार्मिक तपस्या का हिस्सा नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को झकझोरने वाला मौन प्रतिरोध है।
यश ने संकल्प लिया है कि जब तक उसके पिता के हत्यारों को फांसी की सजा नहीं मिलती, वह जूते-चप्पल नहीं पहनेगा, बाल नहीं कटवाएगा और पिता की अस्थियों का विसर्जन नहीं करेगा। आज भी उसके घर में पिता की अस्थियां सुरक्षित रखी हैं, जो उस दिन की प्रतीक्षा कर रही हैं जब दोषियों को कठोर सजा मिलेगी।
166 गवाह, लेकिन चार साल में सिर्फ 35 के बयान
इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है। केस में कुल 166 गवाह हैं, लेकिन घटना के लगभग चार साल बाद भी केवल 30 से 35 गवाहों के ही बयान दर्ज हो पाए हैं। यह धीमी प्रगति परिवार की पीड़ा को और बढ़ा रही है।
स्थिति तब और अधिक पीड़ादायक हो जाती है जब यश को यह जानकारी मिलती है कि कुछ आरोपी जमानत पर बाहर आ रहे हैं। उसे लगता है कि न्याय की उम्मीदें धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही हैं।
‘हर दरवाजे पर मिला केवल आश्वासन’
यश का कहना है कि उसने नेताओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक हर स्तर पर गुहार लगाई, लेकिन उसे केवल आश्वासन ही मिले। उसके शब्दों में, “होली हो या दिवाली, हमारे घर की खुशियां 28 जून 2022 को ही खत्म हो गई थीं। हर जगह सिर्फ भरोसा मिला, न्याय नहीं।”