उल्टी हुई, दौरे पड़े और दम तोड़ दिया, 18 घंटे में 2 चचेरी बहनों की मौत

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बीमार बच्चों को हॉस्पिटल में भर्ती करवाया
उदयपुर, 24 अप्रैल:
संभाग के सलूंबर जिले में 18 घंटे के भीतर 2 चचेरी बहनों की मौत हो गई। दोनों बच्चियों को अचानक उल्टी की शिकायत हुई, फिर उन्हें तेज दौरे पड़ने लगे। दोनों ने घर पर ही दम तोड़ दिया। मामला जिले के लसाडिया क्षेत्र के खजुरी पंचायत के कुंडा गांव का है।
इन मौतों के बाद गांव में डर का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर हैं। वे घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। मेडिकल टीम ने गांव के कुछ बीमार बच्चों को लसाड़िया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती करवाया है।
बीसीएमएचओ डॉ. सिंटू कुमावत ने बताया- अभी दोनों बच्चियों की मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की असली वजह सामने आ पाएगी।
एक बच्ची का ही करवा सके पोस्टमार्टम
जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर 12 बजे आशा (6) पिता तेजा मीणा की अचानक तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे उसकी चचेरी बहन रूसिया (5) पिता समीया मीणा ने भी दम तोड़ दिया। दोनों बच्चियों को उल्टी होने के बाद दौरे पड़े थे।
दो बच्चियों की मौत के बाद बीसीएमएचओ डॉ. सिंटू कुमावत ने मामले को गंभीरता से लिया। रूसिया का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजन को सौंप दिया। आशा का अंतिम संस्कार कर दिए जाने के कारण पोस्टमॉर्टम नहीं करवाया जा सका।
मेडिकल टीमें घर-घर जाकर कर रहीं सर्वे
स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। टीम यह जांच रही है कि क्या कोई और बच्चा भी बीमार तो नहीं है।
सलूंबर में रहस्यमयी बीमारी से हुई थी 8 बच्चों की मौत
इससे पहले, कुंडा गांव से करीब 10 किलोमीटर दूर झल्लारा और लसाडिया क्षेत्र में 1 से 8 अप्रैल के बीच रहस्यमयी बीमारी से 8 बच्चों की मौत हुई थी। इनमें सगे भाई-बहन थे।
इन बच्चों में उल्टी-दस्त की शिकायत सामने आई थी। तब जयपुर और उदयपुर के विशेषज्ञ डॉक्टर्स की टीम ने गांवों में जाकर जांच की थी। टीमों ने 500 से ज्यादा परिवारों का सर्वे किया था।

उदयपुर में आकार ले रहा सेवा, संस्कृति और संवेदना का विराट धाम

मंदिर, गौशाला, हैप्पी होम और संगीत संग्रहालय का अनूठा संगम बनेगा राजस्थान ही नहीं, देश के लिए प्रेरणा केंद्र
उदयपुर, 24 अप्रैल:
झीलों की नगरी उदयपुर के पास सेलू ग्राम की शांत वादियों में एक ऐसा सपना आकार ले रहा है, जो केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि मानवता, संस्कृति और करुणा की नई इबारत लिखने जा रहा है। यह परियोजना ऐसी है, जहाँ भक्ति, सेवा, वात्सल्य और विरासत एक ही परिसर में साकार होंगे।
मोयेंद्र फाउंडेशन द्वारा विकसित किए जा रहे इस अनूठे प्रकल्प में श्री राधा-कृष्ण मंदिर, आधुनिक गौशाला, बुजुर्गों के लिए ‘हैप्पी होम’ और देश का अनूठा संगीत संग्रहालय एक साथ स्थापित किए जाएंगे। यह केवल उदयपुर का नया पर्यटन स्थल नहीं होगा, बल्कि ऐसा मानवीय और सांस्कृतिक केंद्र बनेगा, जो पूरे राजस्थान और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
कल्पना कीजिए एक ऐसे स्थान की, जहाँ मंदिर की घंटियों के बीच गौसेवा की भावना जीवित हो, जहाँ बुजुर्गों को सम्मानजनक आश्रय मिले और जहाँ भारतीय संगीत की विरासत नई पीढ़ी तक पहुँचे। यह परिसर उसी भावना का मूर्त रूप है।
आज जब समाज में परिवार बिखर रहे हैं, बुजुर्ग अकेलेपन से जूझ रहे हैं और परंपराएँ धीरे-धीरे धुंधली पड़ रही हैं, ऐसे समय में यह प्रकल्प एक सामाजिक संजीवनी की तरह सामने आया है। यहाँ बनने वाला ‘हैप्पी होम’ केवल वृद्धाश्रम नहीं होगा, बल्कि ऐसा घर होगा जहाँ बुजुर्ग सम्मान, अपनापन और आध्यात्मिक शांति के साथ जीवन जी सकेंगे।
इसी परिसर में प्रस्तावित संगीत संग्रहालय भारतीय संगीत और लोक वाद्यों की समृद्ध विरासत को सहेजेगा। यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बनेगा। दूसरी ओर, आधुनिक सुविधाओं से युक्त गौशाला गौसेवा की भारतीय परंपरा को नई दिशा देगी।
समाजसेवी रंजना भाटी ने दी दस बीघा भूमि दान
इस विशाल स्वप्न की नींव समाजसेवी कृष्णदासी रंजना भाटी ने अपनी 10 बीघा भूमि दान कर रखी है। उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसी विरासत छोड़ना ही सच्ची सेवा है, जहाँ धर्म और मानवीय संवेदना साथ-साथ जीवित रहें। फाउंडेशन के निदेशक मुकेश माधवानी, दिवाकर अग्रवाल और विजय सराफ का मानना है कि यह किसी एक संस्था का प्रकल्प नहीं, बल्कि “पीपल्स प्रोजेक्ट” है, जिसमें समाज की भागीदारी ही इसकी असली ताकत होगी।
सेवा को संस्कार, संस्कृति को सम्मान और संवेदना को देगा नई पहचान
सेलू ग्राम में बनने वाला यह धाम ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि एक ऐसा राष्ट्रीय विजन है, जो सेवा को संस्कार, संस्कृति को सम्मान और संवेदना को नई पहचान देगा। यह दिन दूर नहीं जब उदयपुर केवल झीलों के लिए नहीं, बल्कि “सेवा और सरोकार की राजधानी” के रूप में भी देशभर में पहचाना जाएगा। मोयेंद्र फाउंडेशन ने इस प्रोजेक्ट में सेवाभावी लोगों से भी सहयोग मांगा है और उनका कहना है कि इस संबंध में मोबाइल नंबर 9829243207 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

उदयपुर की 23 वर्षीय कृति ने छोड़ा बी-टेक, अपनाया संयम का मार्ग

गुप्त जैन भागवती दीक्षा लेकर दिया वैराग्य, समर्पण और सादगी का अद्भुत संदेश
उदयपुर, 24 अप्रैल:
आज के दौर में जहाँ युवा उच्च शिक्षा, करियर और आधुनिक जीवनशैली को सफलता का मानक मानते हैं, वहीं उदयपुर की 23 वर्षीय बेटी कृति मेहता ने संसारिक वैभव, उज्ज्वल भविष्य और बी-टेक जैसी पेशेवर पढ़ाई को त्याग कर जैन भागवती दीक्षा ग्रहण कर एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका यह निर्णय न केवल उदयपुर, बल्कि पूरे समाज के लिए त्याग, संयम और आत्मिक जागरण की प्रेरणा बन गया है।
उदयपुर निवासी कृति मेहता ने बीकानेर जिले के नोखा कस्बे के जोरावरपुरा स्थित बाड़ी शिव मंदिर परिसर में चार अन्य मुमुक्षु बहनों के साथ दीक्षा ग्रहण की। यह पावन दीक्षा भगवान महावीर की पाठ परंपरा के 82वें आचार्य रामेश महाराज तथा उपाध्याय प्रवर्तक राजेश मुनि महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुई।
दीक्षा समारोह का सबसे भावुक और प्रेरक क्षण तब आया जब पूर्व घोषित चार मुमुक्षुओं के साथ कृति मेहता ने गुप्त रूप से दीक्षा लेकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। संयम पथ अपनाने का उनका निर्णय इतना गोपनीय था कि दीक्षा विधि शुरू होने तक किसी को इसकी जानकारी नहीं थी। आज के प्रदर्शन प्रधान युग में यह विरल उदाहरण श्रद्धालुओं के लिए वैराग्य की जीवंत मिसाल बन गया।
श्री साधुमार्गी जैन संघ उदयपुर के अध्यक्ष सागर गोलछा ने बताया कि कृति मूलतः बड़ी सादड़ी की रहने वाली हैं और वर्तमान में उदयपुर के हिरण मगरी सेक्टर-4 में निवासरत हैं। उनके पिता सुनील मेहता स्टेशनरी व्यवसाय से जुड़े हैं और पूरा परिवार धार्मिक संस्कारों से ओत-प्रोत है।
कृति बी-टेक कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रही थीं और आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रही थीं, लेकिन भीतर जागी वैराग्य भावना ने उन्हें संयम के मार्ग की ओर प्रेरित किया। अल्पायु में लिया गया उनका यह निर्णय भौतिकता के युग में त्याग और अध्यात्म की अनमोल मिसाल बन गया है।
दीक्षा उपरांत आचार्यश्री ने कृति का नया नाम “साध्वी रामकर्णिका श्रीजी महाराज” रखा। अन्य नवदीक्षित साध्वियों को भी नए आध्यात्मिक नाम प्रदान किए गए।
आचार्य रामेश महाराज ने कहा, “मोह-माया का त्याग ही सच्चे सुख का मार्ग है। संयम से ही आत्मा परमात्मा बनती है।”
उदयपुर की बेटी कृति मेहता का यह निर्णय बताता है कि सच्चा वैभव बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और समर्पण में है। उनका त्याग आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा और उदयपुर के लिए गौरव का विषय बन गया है।

तीन दशक में तपने लगा उदयपुर, 30 साल में 6 डिग्री बढ़ा तापमान

झीलों की नगरी में बढ़ती गर्मी ने बढ़ाई चिंता, विशेषज्ञ बोले—शहरीकरण और हरियाली में कमी बड़ा कारण
उदयपुर, 24 अप्रैल : कभी अपनी ठंडी आबोहवा, हरियाली और झीलों की वजह से पहचाना जाने वाला उदयपुर अब तेजी से बढ़ती गर्मी की मार झेल रहा है। पिछले तीन दशकों में शहर के अधिकतम तापमान में करीब 6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां वर्ष 1995 में गर्मियों के दौरान अधिकतम तापमान सामान्यतः 39.2 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता था, वहीं 2000 में 40.1, 2005 में 41.3, 2010 में 42.4, 2015 में 44.1 और 2025 में यह 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने लगा है। वर्ष 2016 में 46.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ, जो पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड रहा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि तापमान में यह वृद्धि प्राकृतिक कारणों से अधिक मानवजनित बदलावों का परिणाम है। पर्यावरणविद् डॉ. महेंद्र भानावत का कहना है कि “उदयपुर में तेजी से बढ़ते कंक्रीट निर्माण, पहाड़ियों की कटाई और हरित क्षेत्र घटने से ‘हीट आइलैंड इफेक्ट’ पैदा हो रहा है, जिससे तापमान लगातार बढ़ रहा है।”
वहीं मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरके माथुर बताते हैं कि “पहले उदयपुर के आसपास वन क्षेत्र और जलस्रोत अधिक थे, जिससे तापमान नियंत्रित रहता था। अब शहरी विस्तार और जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी के दिनों में अधिकतम तापमान औसतन 3 से 4 डिग्री तक बढ़ गया है।”
बढ़ते तापमान का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य, जल संसाधनों और बिजली खपत पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। गर्मी के मौसम में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और जल संकट के मामले बढ़ रहे हैं। साथ ही एयर कंडीशनर और कूलर के उपयोग से बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
पर्यावरणविद डॉ. अनिल मेहता का मानना है कि यदि वृक्षारोपण, जल संरक्षण और अनियंत्रित शहरीकरण पर रोक जैसे कदम समय रहते नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में उदयपुर का तापमान और अधिक बढ़ सकता है। झीलों की नगरी के प्राकृतिक संतुलन को बचाने के लिए प्रशासन और आमजन दोनों को मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे, तभी उदयपुर की ठंडी पहचान बरकरार रह सकेगी।

उदयपुर में CGHS वेलनेस सेंटर का रास्ता साफ, स्टाफ पदों को मिली मंजूरी

दक्षिण राजस्थान के पहले सेंटर की शुरुआत जल्द, सांसद डॉ. मन्नालाल रावत की पहल रंग लाई
उदयपुर, 24 अप्रैल :
उदयपुर में लंबे समय से प्रतीक्षित सीजीएचएस (CGHS) वेलनेस सेंटर की शुरुआत अब जल्द होने जा रही है। केंद्र सरकार ने इस सेंटर के संचालन के लिए आवश्यक स्टाफ पदों को मंजूरी दे दी है, जिससे अब तक चली आ रही तकनीकी बाधा दूर हो गई है।
यह वेलनेस सेंटर शुरू होने के बाद दक्षिण राजस्थान का पहला और एकमात्र CGHS वेलनेस सेंटर होगा, जिससे हजारों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिलेगी।
उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत की लगातार कोशिशों के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह स्वीकृति प्रदान की है। सांसद ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने स्वयं उन्हें इस स्वीकृति की जानकारी दी। फिलहाल सेंटर के लिए चार प्रमुख पदों को मंजूरी मिली है, जिनमें मेडिकल ऑफिसर, नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट और जूनियर हेल्थ एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट शामिल हैं।
उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले हजारों केंद्रीय कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मचारी और वरिष्ठ नागरिक लंबे समय से इस सुविधा की मांग कर रहे थे। अब तक उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अन्य शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था या लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। ऐसे में यह सेंटर शुरू होने से उन्हें घर के पास ही बेहतर और सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने इस स्वीकृति के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा का आभार जताया है।
पदों की स्वीकृति मिलना बड़ी उपलब्धि: सांसद
सांसद ने कहा कि “पदों की स्वीकृति मिलना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन हमारा लक्ष्य जल्द से जल्द सेंटर को शुरू कर आम कर्मचारियों और पेंशनर्स तक इसका लाभ पहुंचाना है।” CGHS वेलनेस सेंटर के शुरू होने से न केवल उदयपुर बल्कि पूरे दक्षिण राजस्थान के केंद्रीय कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

कोटड़ा ब्लॉक बैठक में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और मौसमी बीमारियों पर दिए निर्देश

जिला स्तरीय अधिकारियों ने राष्ट्रीय कार्यक्रमों की समीक्षा कर फील्ड स्टाफ को तकनीकी अपडेट दिए
उदयपुर, 24 अप्रैल:
जिले के कोटड़ा ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण ब्लॉक स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, नियमित टीकाकरण, फैमिली प्लानिंग तथा मौसमी बीमारियों की रोकथाम जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में जिला स्तर से जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राकेश गुप्ता, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. विक्रम सिंह तथा शहर प्रभारी डॉ. कैलाश शर्मा उपस्थित रहे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक आदित्य ने बताया कि बैठक में ब्लॉक के समस्त नव नियुक्त एएनएम, सीएचओ, बीपीएम, एलएचवी, ब्लॉक सीएमएचओ सहित स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्मिकों ने भागीदारी निभाई।
आरसीएचओ डॉ. राकेश गुप्ता ने एएनसी रजिस्ट्रेशन, गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण और नियमित जांच बेहद आवश्यक है।
वहीं शहर प्रभारी डॉ. कैलाश शर्मा ने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम तथा परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों के संबंध में तकनीकी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कार्मिकों को क्षेत्र में जाकर लोगों को परिवार कल्याण सेवाओं के प्रति जागरूक करना चाहिए, ताकि योजनाओं का अधिकतम लाभ आमजन तक पहुंच सके।
डिप्टी सीएमएचओ डॉ. विक्रम सिंह ने मौसमी बीमारियों, हीटवेव प्रबंधन तथा एनसीडी कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम को देखते हुए आमजन को जागरूक करना और समय पर उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक के दौरान ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. शंकर चौहान ने सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा की तथा जिला स्तरीय अधिकारियों के मार्गदर्शन के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की समीक्षा बैठकों से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होता है और फील्ड स्तर पर कार्यरत कार्मिकों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलती है।

श्री सांवलिया सेठ के भंडार में टूटा हर रिकॉर्ड, एक माह में चढ़े 41.67 करोड़ रुपए

मासिक भंडार गणना में पहली बार सामने आई इतनी बड़ी राशि, सोना-चांदी की भेंट भी बढ़ी
चित्तौड़गढ़, 24 अप्रैल
: मेवाड़ अंचल के प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर के मासिक भंडार की गणना सात चरणों में पूरी होने के बाद इस बार 41 करोड़ 67 लाख 38 हजार 569 रुपए की ऐतिहासिक राशि प्राप्त हुई है। मंदिर के इतिहास में मासिक भंडार से प्राप्त यह अब तक की सबसे बड़ी राशि है, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।
मंदिर मंडल बोर्ड के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव ने बताया कि मंदिर का भंडार 16 अप्रैल को खोला गया था, जिसके बाद सात चरणों में गणना की गई। भंडार से 33 करोड़ 21 लाख 63 हजार 539 रुपए प्राप्त हुए, जबकि भेंट कक्ष और ऑनलाइन डोनेशन के माध्यम से 8 करोड़ 45 लाख 75 हजार 30 रुपए की राशि प्राप्त हुई।
नकद राशि के अलावा श्रद्धालुओं ने बड़ी मात्रा में सोना-चांदी भी अर्पित किया। भंडार और भेंट कक्ष से कुल 660 ग्राम 500 मिलीग्राम सोना तथा 84 किलो 620 ग्राम चांदी प्राप्त हुई।
परंपरा के अनुसार वर्ष में आठ माह तक अमावस्या से पूर्व चतुर्दशी को श्री सांवलिया सेठ का भंडार खोला जाता है। इस बार श्रद्धालुओं की आस्था ने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। मंदिर प्रशासन के अनुसार यह बढ़ती श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है।
भंडार गणना के दौरान मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रभा गौतम, मंदिर मंडल बोर्ड सदस्य पवन तिवारी, किशनलाल अहीर, रामलाल गुर्जर, हरिराम गाडरी, प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र सिंह तथा मंदिर एवं संपदा प्रभारी भेरुगिरि गोस्वामी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इतिहास में पहली बार मासिक भंडार से इतनी बड़ी राशि प्राप्त होने पर मंदिर प्रशासन में उत्साह का माहौल है। श्रद्धालुओं का मानना है कि श्री सांवलिया सेठ के प्रति लोगों की अटूट आस्था ही इस ऐतिहासिक चढ़ावे का आधार है।

अवैध बंदूकें बनाकर बेचने वाला आरोपी गिरफ्तार

फलासिया पुलिस ने 6 बंदूकें और हथियार बनाने का सामान किया जब्त
उदयपुर, 24 अप्रैल :
उदयपुर जिले की फलासिया थाना पुलिस ने अवैध टोपीदार बंदूकें बनाकर बेचने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 6 बंदूकें और हथियार बनाने का सामान जब्त किया है।
थानाधिकारी सीताराम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी कानसिंह (60) पुत्र मीठेसिंह गरासिया निवासी गरासिया फला, पीपलबारा, फलासिया है। यह कार्रवाई उदयपुर एसपी डॉ. अमृता दुहन के निर्देश पर जिलेभर में अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।
मुखबिर से सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने आरोपी के घर पर दबिश दी। तलाशी के दौरान वहां से 3 अवैध टोपीदार बंदूकें, 3 पुरानी बंदूकें तथा हथियार बनाने में उपयोग होने वाला उपकरण बरामद हुआ। पूछताछ में आरोपी बंदूकों के वैध दस्तावेज या लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका।
पुलिस ने मौके से बंदूकों की नाल, 2 ग्रेंडर, 2 ड्रिल मशीन, इलेक्ट्रिक वेल्डिंग मशीन, कटर, आरी और अन्य उपकरण भी जब्त किए हैं।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूछताछ में यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी अब तक कितनी बंदूकें बनाकर किन-किन लोगों को बेच चुका है। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है।

विज्ञान समिति के प्रकृति प्रेमियों ने किया प्रकृति साधना केंद्र का भ्रमण

उदयपुर 24 अप्रैल: विज्ञान समिति उदयपुर से 25 प्रकृति प्रेमियों के एक दल ने प्रातः 8 से 12.00 विद्याभवन के भीलों के बेदला स्थित प्रकृति साधना केंद्र का भ्रमण कर पर्यावरण संरक्षण के कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
केंद्र समन्वयक डॉ. आर.एल. श्रीमाल ने बताया कि 125 हेक्टेयर में फैला यह सघन वन अरावली की विभिन्न वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं की शरणस्थली है, जहाँ अनेक प्रजातियों का संरक्षण किया जा रहा है। इसमें अनेक प्रकार के पक्षी मुक्त विचरण करते हैं। समिति अध्यक्ष प्रो. महीप भटनागर ने पक्षियों की प्रजातियों, उनके आवास, भोजन एवं खाद्य शृंखला की जानकारी प्रस्तुत की।
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष मुनीश गोयल ने बताया कि इस स्थान को ‘नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर’ के रूप में विकसित किया गया है। महासचिव डॉ. आर.के. गर्ग ने वहाँ उपस्थित वृक्षों, झाड़ियों, शाकीय पादपों, विभिन्न घास प्रजातियों, सरीसृपों तथा उभयचरों के बारे में विस्तार से बताया।
भ्रमण में कुलप्रमुख डॉ. के.एल. कोठारी के अलावा डॉ. के.एल. तोतावत, शिवरतन तिवारी, डॉ. पुष्पा कोठारी, डॉ. नरेश शर्मा एवं अन्य सदस्यों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। डॉ. श्रीमाल ने वन क्षेत्र में आग लगने की स्थिति में बचाव के उपायों की भी जानकारी साझा की। यह जानकारी विज्ञान समिति के मीडिया प्रभारी प्रोफेसर विमल शर्मा ने दी।

हवाई हमले की स्थिति में आपदा से निपटने की परखी तैयारियां

साकरोदा गैस प्लांट पर हाई-लेवल मॉक ड्रिल
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर जिला प्रशासन सहित विभिन्न एजेंसियों ने किया संयुक्त पूर्वाभ्यास
उदयपुर, 24 अप्रैल:
गृह मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार नागरिक सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए साकरोदा स्थित भारत पेट्रोलियम के गैस प्लांट पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसमें हवाई हमले के बाद गैस प्लांट में आग लगने जैसी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए तैयारियों को परखा गया।
गृह मंत्रालय की ओर से वर्ष 2026 के लिए मॉक ड्रिल की थीम हवाई हमला और ब्लैक आउट रखी गई है। उसके अनुरूप जिला मजिस्ट्रेट गौरव अग्रवाल के निर्देशन में जिला प्रशासन, बीपीसीएल, नागरिक सुरक्षा विभाग, फायर ब्रिगेड, पुलिस, होमगार्ड, चिकित्सा सहित विभिन्न एजेंसियों ने समन्वय के साथ भाग लिया। शनिवार शाम ठीक 7.25 बजे साकरोदा प्लांट से प्रशासन आदि सभी एजेंसी को सूचना दी गई। इसमें बताया कि प्लांट के स्टोरेज के समीप एयर स्ट्राइक के चलते विस्फोटक गिरा और उससे आग लग गई तथा संबंधित एरिया में ब्लेक आउट हो गया है। गैस के स्टोरेज कैप्सुल में लीकेज होने की भी सूचना प्रसारित की गई। प्रशासन सहित अन्य टीमें मौके पर पहुंचे इससे पूर्व प्लांट मैनेजर रामानुज कर्मकार के निर्देशन में बीपीसीएल की टीमों ने संबंधित एहतियातन कार्यवाही प्रारंभ की। फायर फाइटिंग सिस्टम ऑन किया गया। इस बीच अग्निशमन वाहन मय दल, सिविल डिफेन्स टीम, पुलिस व होमगार्ड टीमें, चिकित्सा टीम मय एम्बुलेंस के मौके पर पहुंची। जिला प्रशासन के निर्देश पर एहतियातन पूरे एरिया में ब्लैक आउट कराया। सभी टीमों ने समन्वय से काम करते हुए ब्लैकआउट, फायर फाइटिंग, हादसे में हताहत लोगों का रेस्क्यू कर उन्हें चिकित्सालय तक पहुंचाना जैसी गतिविधियों का वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप प्रदर्शन किया गया, जिससे आपदा प्रबंधन की प्रभावशीलता को जांचा जा सके।
पूर्वाभ्यास के दौरान आपातकालीन प्रतिक्रिया, संसाधनों की उपलब्धता, और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल को विशेष रूप से परखा गया। मौके पर जिला कलेक्टर के निर्देशन में एडीएम प्रशासन दीपेंद्र सिंह राठौड़, अग्निशमन अधिकारी शिवराम मीणा, सहायक अग्निशमन अधिकारी नवदीपसिंह बग्गा सहित सभी संबंधित अधिकारी मय टीम के मौजूद रहे। एडीएम श्री राठौड़ ने बताया कि इस तरह के मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।

राज्य पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता के लिए उदयपुर टीम घोषित

जयेश कामोया, रूपेश बरांडा और मानसी रावत को सौंपी कप्तानी
उदयपुर, 24 अप्रैल
: 45वीं राजस्थान राज्य जूनियर एवं मास्टर तथा 23वीं राजस्थान राज्य सब जूनियर इक्विप्ड पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता के लिए उदयपुर टीम की घोषणा कर दी गई है। यह प्रतियोगिता 25 से 27 अप्रैल 2026 तक बीकानेर के चिरंजीव कुंज सभागार में आयोजित होगी।
जिला पावरलिफ्टिंग संघ उदयपुर के सचिव विनोद साहू ने बताया कि जूनियर पुरुष टीम की कप्तानी जयेश कामोया, सब जूनियर टीम की कप्तानी रूपेश बरांडा तथा महिला टीम की कप्तानी मानसी रावत करेंगी।
जूनियर पुरुष वर्ग में जयेश कामोया, मितांशु सेन, युवराज सिंह, लक्षित नेनावा, पुष्पेंद्र सिंह राठौड़, चित्रांश घनचाल, लक्षित कुमावत और प्रियांशु सालवी को शामिल किया गया है। जूनियर महिला वर्ग में मानसी रावत, मीमांसा जोशी और हंसिका कामोया चयनित हुई हैं।
सब जूनियर बालक वर्ग में रूपेश बरांडा, मानव सोनी, दिव्यांश साहू और भव्य अग्रवाल, जबकि सब जूनियर महिला वर्ग में हंसिका कामोया, धानी साहू और माही टीम का हिस्सा होंगी। मास्टर वर्ग में सोहन नलवाया और जितेंद्र राजपुरोहित को शामिल किया गया है।
टीम मैनेजर विनोद साहू, पुरुष टीम के कोच गौरव साहू तथा महिला टीम की कोच नीलम डांगी होंगी। उदयपुर टीम बीकानेर के लिए रवाना हो गई है। खिलाड़ियों को विभिन्न खेल पदाधिकारियों ने शुभकामनाएं दी हैं।

भागवत कथा में गूंजा भक्ति और आत्मचिंतन का संदेश

पुष्कर दास महाराज बोले—मोह और अहंकार त्यागकर ही मिलती है आत्मिक शांति
उदयपुर, 24 अप्रैल:
विवेक नगर सेक्टर-3 स्थित विवेक पार्क में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन श्री पुष्कर दास महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति, सत्संग और आत्मचिंतन का संदेश दिया। अपने ओजस्वी प्रवचनों में उन्होंने कहा कि भगवान के अवतार हमारे आसपास ही होते हैं, लेकिन मोह और अज्ञान के कारण मनुष्य उन्हें पहचान नहीं पाता।
महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन में मोह और अहंकार सबसे बड़े बंधन हैं, जिनसे मुक्ति के लिए पूजा-पाठ, भजन और सत्संग आवश्यक हैं। कथा श्रवण से मन की अशांति दूर होती है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि “मन की बीमारी का उपचार केवल परमात्मा के नाम स्मरण से ही संभव है।”
श्रावण मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। जहां सत्य है, वहीं ईश्वर का वास है। कथा में उन्होंने भगवान विष्णु के मत्स्य, कच्छप, वराह और मोहिनी अवतारों की महिमा बताई तथा राजा भरत के प्रसंग से मोह के दुष्परिणाम समझाए।
संयोजक विठ्ठल वैष्णव ने बताया कि शनिवार को कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए।

उदयपुर में ‘बीसीआई पिनेकल’ की भव्य शुरुआत

बिजनेस नेटवर्किंग के नए मंच से उद्यमियों को मिलेगा विकास और दीर्घकालिक सहयोग का अवसर
उदयपुर, 24 अप्रैल
: झीलों की नगरी उदयपुर में गुरुवार शाम बिजनेस नेटवर्किंग और प्रोफेशनल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में बिजनेस सर्कल इंटरनेशनल (BCI) के नए चैप्टर ‘बीसीआई पिनेकल – अ गेटवे टू द टॉप’ का भव्य शुभारंभ ओरिएंटल पैलेस रिजॉर्ट, सुभाष नगर में हुआ। कार्यक्रम में शहर के बड़ी संख्या में बिजनेसमैन, प्रोफेशनल्स और विजिटर्स ने भाग लेकर इसे सफल बनाया।
बीसीआई के फाउंडर एवं चेयरमैन मुकेश माधवानी ने कहा कि बीसीआई ने अपने दो वर्षों के सफर में उदयपुर के व्यापारिक जगत में मजबूत और भरोसेमंद पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि संगठन का उद्देश्य केवल व्यापारिक संपर्क बढ़ाना नहीं, बल्कि उद्यमियों को विकास की सही दिशा देना है। उन्होंने कहा कि बीसीआई पिनेकल लेकसिटी के बिजनेसमैन और प्रोफेशनल्स को ऐसा मंच देगा, जहां वे अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकेंगे।
पिनेकल चैप्टर के प्रेसीडेंट सीए अंशुल मोगरा ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में अकेले व्यापार करना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में स्ट्रक्चर्ड और ट्रस्ट-बेस्ड नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म की जरूरत पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि यह चैप्टर केवल रेफरल नेटवर्किंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डेवलपमेंट, लर्निंग और लॉन्ग-टर्म बिजनेस रिलेशनशिप्स पर फोकस करेगा।
सेक्रेटरी शालिनी भटनागर ने बताया कि यह ऐसा मंच है जहां नए और अनुभवी, दोनों प्रकार के उद्यमियों को समान अवसर मिलेगा। वहीं ट्रेजरर वात्सल्य सोनी ने मेंबरशिप प्रक्रिया, फीस स्ट्रक्चर और चैप्टर की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए कहा कि इसे पूरी पारदर्शिता और प्रोफेशनल दृष्टिकोण के साथ तैयार किया गया है।
कार्यक्रम के अंत में फेलोशिप डिनर और इंटरएक्टिव सेशन आयोजित हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने व्यवसाय, सेवाओं और विशेषज्ञता साझा की। इस दौरान संभावित सहयोग और नए व्यावसायिक अवसरों पर चर्चा हुई।
इस अवसर पर देवेन्द्र सिंह करीर, संजीव पटवा, आलोक गुप्ता, हीना पथिक, डॉ. रेखा सोनी सहित बड़ी संख्या में सदस्य और अतिथि उपस्थित रहे। यह नया चैप्टर उदयपुर के व्यापारिक समुदाय के लिए विकास, सीखने और दीर्घकालिक व्यापारिक सहयोग का मजबूत मंच बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एमपीयूएटी में अनुसंधान परिषद की 22वीं बैठक, कृषि नवाचारों को राष्ट्रीय जरूरतों से जोड़ने पर जोर

कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह बोले—अनुसंधान ऐसा हो जो किसान, बाजार और विश्वविद्यालय—तीनों को सशक्त बनाए
उदयपुर, 24 अप्रैल :
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर की अनुसंधान परिषद की 22वीं बैठक शुक्रवार को विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशालय में कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में वर्षभर के अनुसंधान कार्यों की समीक्षा, उपलब्धियों का मूल्यांकन और आगामी वर्षों की अनुसंधान रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. रवि कुमार माथुर, निदेशक, भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, तथा डॉ. देव व्रत सिंह, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर, विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय सीमित संसाधनों और कम वैज्ञानिकों के बावजूद कृषि अनुसंधान में उत्कृष्टता की मिसाल पेश कर रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने पिछले वर्षों में विभिन्न फसलों की कई उन्नत किस्में विकसित की हैं तथा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान प्रकाशनों के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। वर्ष 2024 और 2025 में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को 8 व्यक्तिगत सम्मान तथा 2 परियोजनाओं को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर किसानों, विपणनकर्ताओं और उपभोक्ताओं की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ा होना चाहिए। साथ ही अनुसंधान परियोजनाओं को इस प्रकार तैयार करने की आवश्यकता है कि वे विश्वविद्यालय की आय वृद्धि और नई तकनीकों के विकास में सहायक बनें। कुलगुरु ने वैज्ञानिकों को पेटेंट, तकनीकी हस्तांतरण और व्यवसायीकरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
विशेषज्ञ डॉ. रवि कुमार माथुर ने बायोपॉलिमर, समन्वित कृषि प्रणाली, संरक्षित खेती और तकनीकी मानचित्रण पर अनुसंधान बढ़ाने की सलाह दी। वहीं डॉ. देव व्रत सिंह ने किसान हित में कृषि यंत्रों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि कृषि अनुसंधान को केवल नौकरी नहीं बल्कि जुनून के रूप में लेना चाहिए।
अनुसंधान निदेशक डॉ. अरविन्द वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में वर्तमान में 31 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं सहित कुल 91 अनुसंधान परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। उन्होंने पिछली परिषद बैठक के निर्णयों की अनुपालना रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। बैठक में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत तैयार तकनीकी प्रगति बुलेटिन का विमोचन भी किया गया।
बैठक में विश्वविद्यालय के निदेशक, विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों के प्रभारी, विभागाध्यक्ष और कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान को राष्ट्रीय आवश्यकताओं, नवाचार और किसानों की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।