एक मिमी के लड्डू गोपाल को देखने के लिए लेना पड़ेगा लेंस का सहारा

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डॉ. इकबाल सक्का ने 56 घंटे में चांदी-तांबे से रचा अद्भुत कृष्ण जन्म प्रसंग, टोकरी में लेटे हैं मूंग के दाने जितने बाल गोपाल
उदयपुर, 2 सितंबर:
जन्माष्टमी के अवसर पर उदयपुर के अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण शिल्पी एवं 211 विश्व रिकॉर्ड धारक डॉ. इकबाल सक्का ने सूक्ष्म कलाकारी का ऐसा नमूना तैयार किया है, जिसे नंगी आंखों से देखना भी मुश्किल है। उन्होंने चांदी और तांबे से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ा पौराणिक प्रसंग साकार किया है। इसमें लड्डू गोपाल का आकार महज एक मिलीमीटर, यानी करीब मूंग के दाने जितना है। इसे देखने के लिए दर्शकों को लेंस का सहारा लेना पड़ेगा।
कलाकृति में वासुदेव नवजात कृष्ण को टोकरी में लेकर यमुना पार करते हुए नजर आते हैं। बाल कृष्ण को निद्रा मुद्रा में दर्शाया गया है। रचना में वासुदेव और कालिया नाग का आकार करीब एक सेंटीमीटर, जबकि टोकरी महज दो मिलीमीटर की है। पंचमुखी नाग देवता का छत्र बनाकर भगवान कृष्ण की रक्षा का प्रसंग भी जीवंत किया गया है।
56 घंटे में तैयार हुई सूक्ष्म कलाकृति
डॉ. सक्का के अनुसार इस कृति को तैयार करने में करीब 56 घंटे का समय लगा। कलाकृति में पानी भरकर यमुना नदी का स्वरूप दिया गया है। चांदी और तांबे के बेहद छोटे आकार में तैयार किए गए पात्र और प्रसंग इसकी विशेषता हैं। डॉ. सक्का इस कृति को अपने संग्रहालय में प्रदर्शित करेंगे। साथ ही उदयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों दूध तलाई, मोती मगरी, सहेलियों की बाड़ी और फतहसागर पर भी इसे ले जाने की योजना है, ताकि शहर आने वाले देश-विदेश के पर्यटक इस अनूठी सूक्ष्म कलाकृति को देख सकें। यह कलाकृति जन्माष्टमी पर उदयपुर की कला और शिल्प परंपरा का नया आकर्षण बनेगी।