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63 की उम्र में बनीं प्रमाणित योग प्रशिक्षक, घुटनों का प्रत्यारोपण भी नहीं रोक सका हौसला

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63 की उम्र में बनीं प्रमाणित योग प्रशिक्षक, घुटनों का प्रत्यारोपण भी नहीं रोक सका हौसला

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200 घंटे का योग शिक्षक प्रशिक्षण और न्यूट्रिशन कोर्स पूरा कर अब समाज को दे रहीं स्वस्थ जीवन का संदेश
उदयपुर, 18 जुलाई:
उम्र यदि जुनून के सामने छोटी पड़ जाए तो सफलता की नई मिसाल कायम होती है। पूर्व सीएमएचओ डॉ. सुरेश धन्यच की धर्मपत्नी ने 63 वर्ष की आयु में 200 घंटे का योग शिक्षक प्रशिक्षण (Yoga Teacher Training Course) सफलतापूर्वक पूरा कर यह साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। खास बात यह है कि उनके दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) हो चुका है, इसके बावजूद उन्होंने नियमित अभ्यास और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर यह उपलब्धि हासिल की।
समत्वम् योगशाला में योग विशेषज्ञ डॉ. गुनीत मोंगा भार्गव के मार्गदर्शन में उन्होंने योगासन, प्राणायाम, ध्यान, योग दर्शन, शरीर रचना विज्ञान और स्वस्थ जीवनशैली का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके साथ ही न्यूट्रिशन का प्रशिक्षण लेकर संतुलित आहार और स्वास्थ्य प्रबंधन का भी व्यापक ज्ञान अर्जित किया।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे अपने समाज और आवासीय सोसायटी में नियमित योग कक्षाएं संचालित कर रही हैं तथा लोगों को योग, प्राणायाम और संतुलित आहार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से अनेक लोग स्वस्थ जीवनशैली की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
डॉ. गुनीत मोंगा भार्गव ने बताया कि वे पिछले दो दशकों से योग शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं और उनके मार्गदर्शन में अनेक प्रशिक्षु प्रमाणित योग शिक्षक बन चुके हैं। उन्होंने कहा, “योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन जीने की कला है। सीखने का जुनून और निरंतर अभ्यास हो तो उम्र कभी भी सफलता की बाधा नहीं बनती।” यह उपलब्धि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मानते हैं कि नई शुरुआत करने या नया कौशल सीखने के लिए उम्र मायने रखती है।

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