राम दरबार विवाद पर भाजपा पदाधिकारियों की सफाई, बोले- भावना शुद्ध थी, राजनीति की जा रही
Share
राजसमंद, 12 अगस्त: नाथद्वारा के नई हवेली चौक स्थित श्रीराम मंदिर में राम दरबार की प्रतिमाएं रखने और बाद में हटाने को लेकर चल रहे विवाद में बुधवार को भाजपा पदाधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। भाजपा जिला महामंत्री प्रदीप काबरा ने कहा कि मंदिर करीब दो साल से बंद था और स्थानीय लोगों व पार्षद की ओर से यहां प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग की जा रही थी। इसी के तहत जनसहयोग से राम दरबार की प्रतिमाएं मंगवाई गई थीं।
काबरा ने कहा कि प्रतिमाएं मंदिर में केवल जांच और नाप लेने के लिए रखी गई थीं। शुभ मुहूर्त नहीं होने के कारण उनकी स्थापना नहीं की गई। उन्होंने प्रतिमाओं को ग्राइंडर से काटकर हटाने के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि मंदिर समिति की जानकारी नहीं थी और उद्देश्य पूरी तरह धार्मिक था। किसी की भावना आहत हुई है तो उन्हें खेद है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग धार्मिक मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं। काबरा ने कहा कि शुभ मुहूर्त आने पर सभी को साथ लेकर विधि-विधान से प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी।
हालांकि पत्रकार वार्ता में मंदिर में वीडियो बनाने से रोकने, धक्का-मुक्की और जूते पहनकर प्रवेश करने जैसे सवालों पर भाजपा पदाधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
एक दिन पहले हुआ था प्रदर्शन
प्रतिमाएं बिना अनुमति रखने और बाद में उन्हें काटकर हटाने के आरोपों को लेकर मंगलवार को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। नाथद्वारा के चौपाटी स्थल पर भाजपा पदाधिकारियों का पुतला भी फूंका गया। कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
मंदिर समिति ने दी थी शिकायत
श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व पालिकाध्यक्ष मनीष राठी ने घटना को धार्मिक आस्था से खिलवाड़ बताते हुए श्रीनाथजी मंदिर थाने में शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ठेकेदार लोकेश खटीक ने प्रतिमाएं हटाने का काम नगर पालिका आयुक्त के आदेश पर करने की बात कही।
वहीं नगर पालिका आयुक्त सौरभ कुमार जिंदल ने कहा था कि उन्होंने न तो प्रतिमाएं स्थापित करने और न ही हटाने का कोई आदेश दिया। समिति के अनुसार नगर पालिका के एईएन संकल्प सिंघल ने खिड़की लगाने के काम के लिए करीब सात दिन पहले ठेकेदार को कम्युनिटी हॉल की चाबी दी थी। आरोप है कि इसी चाबी का इस्तेमाल प्रतिमाएं रखने और बाद में हटाने में किया गया।

