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मतदान केंद्र पर मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित, पहचान पत्र की मूल प्रति जरूरी, उदयपुर की अन्य खबरें भी एक साथ

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मतदान केंद्र पर मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित, पहचान पत्र की मूल प्रति जरूरी, उदयपुर की अन्य खबरें भी एक साथ

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उदयपुर, 31 अगस्त: नगर निकाय चुनाव-2026 को लेकर प्रशासन ने मतदान केंद्रों पर पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव अग्रवाल ने बताया कि मतदान केंद्र के अंदर मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। मतदाताओं को मतदान के लिए निर्वाचन आयोग का मूल मतदाता पहचान पत्र साथ लाना होगा। पहचान पत्र नहीं होने पर 11 वैकल्पिक फोटोयुक्त दस्तावेजों में से किसी एक की मूल प्रति दिखाकर मतदान किया जा सकेगा। मोबाइल में सॉफ्ट कॉपी या फोटोकॉपी मान्य नहीं होगी।
11 वैकल्पिक दस्तावेज मान्य
इनमें आधार कार्ड, मनरेगा/वीबी जी राम जी जॉब कार्ड, बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक, आयुष्मान हेल्थ कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज, सरकारी/पीएसयू कर्मचारियों का फोटोयुक्त पहचान पत्र, सांसद-विधायक-एमएलसी का आधिकारिक पहचान पत्र तथा यूडीआईडी कार्ड शामिल हैं। दस्तावेज 19 अगस्त 2026 से पहले जारी होना आवश्यक है।
फोटो-वीडियोग्राफी पर भी रोक
मतदान और मतगणना केंद्र के अंदर फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी प्रतिबंधित रहेगी। अधिकृत मीडियाकर्मी केंद्र के बाहर की गतिविधियों की कवरेज कर सकेंगे। सभी मतदान केंद्रों पर मतदाता सहायता केंद्र बनाए जाएंगे, जहां बीएलओ मतदाताओं को सूची में नाम, क्रमांक और भाग संख्या की जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

उचित मूल्य दुकानों के लिए आवेदन 7 सितंबर तक

उदयपुर, 31 अगस्त: जिला रसद कार्यालय उदयपुर प्रथम एवं द्वितीय द्वारा रिक्त एवं नवसृजित उचित मूल्य दुकानों के पात्र आवेदकों को आवंटन के लिए गुरूवार 13 अगस्त को विज्ञापन जारी किया गया था। जिला रसद अधिकारी मणि खींची ने बताया कि इन दुकानों के लिए आवेदन पत्र सोमवार 7 सितंबर तक जिला रसद कार्यालय में 100 रुपए का पोस्टल ऑर्डर जमा कर प्राप्त किए जा सकते हैं। आवेदन जमा कराने की अंतिम तिथि शुक्रवार, 30 सितंबर है।
जिला रसद अधिकारी ने बताया कि तहसील बड़गांव की बड़ी, वाटी बी, तहसील भीण्डर की फुसरिया, सालेड़ा, भावपुरा, कुंथवास तथा नगर पालिका भीण्डर के वार्ड-01 एवं वार्ड-02 की दुकानें शामिल हैं। नगर निगम उदयपुर में वार्ड 22 पुराना/37 नया, वार्ड 24 पुराना/56 नया, वार्ड 35 पुराना/45 नया, वार्ड 40 पुराना/15 नया तथा वार्ड 05 पुराना/06 नया की दुकानें शामिल हैं।
इसी प्रकार तहसील मावली में लोपड़ा, फलीचड़ा, भीमल, वार्ड-09 फतहनगर-सनवाड़, तहसील बारापाल में सेठजी की कुण्डाल, तहसील कुराबड़ में कुराबड़-ए, साकरोदा, वल्लभ, पाड़ा खादरी, खारवा, तहसील कोटड़ा में डांग-बी, गोगरूद्ध, दोतड़, गुरा ढेढमारिया, साण्डमारिया बी, मालवा का चौरा बी, डुंगरियां, जोगीवड़-बी तथा तहसील फलासिया में मादला एवं लथूनी की दुकानें शामिल हैं।
इसके अलावा तहसील झाड़ोल में काडा, तहसील ऋषभदेव में कटेव एवं गोडियावाड़ा, तहसील गोगुन्दा में मजावड़ी-।।, तहसील सायरा में नान्देशमा तथा तहसील खैरवाड़ा में बड़ला-ए की दुकानें भी शामिल की गई हैं।

संस्कृत श्लोक पाठ में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

उदयपुर, 31 अगस्त: संस्कृत सप्ताह के तहत संस्कृत भारती, उदयपुर और महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्विद्यालयी संस्कृत श्लोक पाठ प्रतियोगिता आयोजित हुई। प्रतियोगिता में उदयपुर के करीब 30 विद्यालयों के 110 विद्यार्थियों ने भाग लेकर संस्कृत के प्रति अपनी रुचि और प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
दो वर्गों में हुई प्रतियोगिता
कार्यक्रम का शुभारंभ वेद पाठ, सरस्वती पूजन और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। विद्यार्थियों ने श्रीमद्भगवद्गीता एवं प्राचीन संस्कृत ग्रंथों के श्लोकों का शुद्ध उच्चारण, स्वर-लय और भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण किया। प्रतियोगिता कनिष्ठ एवं वरिष्ठ दो वर्गों में आयोजित की गई। निर्णायकों डॉ. योगेश पालीवाल एवं डॉ. मुरलीधर पालीवाल ने उच्चारण, स्वर, लय, भाव एवं प्रस्तुति के आधार पर मूल्यांकन किया।
इस अवसर पर संस्कृत भारती के प्रांत संपर्क प्रमुख डॉ. यज्ञ आमेटा ने कहा कि संस्कृत भारत की समृद्ध ज्ञान और संस्कृति परंपरा की अमूल्य विरासत है। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत को अध्ययन और जीवन से जोड़ने का आह्वान किया। प्रधानाचार्य डॉ. राखी त्रिवेदी सहित अतिथियों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

कला, साहित्य और संगीत से गुलजार हुआ उदयपुर

‘Artist Meetup’ में शहर के कलाकारों ने दी प्रस्तुतियां, रचनात्मक समुदाय को मजबूत बनाने पर जोर
उदयपुर, 31 अगस्त:
झीलों की नगरी उदयपुर में कला, साहित्य और संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। फतेहसागर झील स्थित विंढम ग्रैंड उदयपुर पैलेस में The Soulful Tales, I AM YOGA Studio, Udaipur Gazette और Fitness Forever के संयुक्त तत्वावधान में ‘Artist Meetup’ आयोजित हुआ। कार्यक्रम में शहर के संगीतकारों, कवियों, चित्रकारों और युवा रचनाकारों ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कला को बताया अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम
कार्यक्रम की शुरुआत The Soulful Tales के दिग्विजय राजक ने कला और संस्कृति के महत्व पर विचार रखते हुए की। उन्होंने कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और रचनात्मकता को बढ़ाने के साथ समाज को जोड़ने की शक्ति भी है।
इसके बाद एकस्टिक म्यूजिक परफॉर्मेंस, ओपन माइक पोएट्री और जैम सेशन ने माहौल को संगीतमय बना दिया। कलाकारों ने प्रस्तुतियों के साथ एक-दूसरे से संवाद और नेटवर्किंग की तथा मजबूत क्रिएटिव कम्युनिटी बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में आरजे काव्या और परितोष सुथार विशेष अतिथि रहे। संयुक्ता मालवीय ने प्रभावी मंच संचालन किया, जबकि ओजस जैन और हेतल दी ने समन्वय संभाला। I AM YOGA Studio से ध्रुविल वाया, वंशिका जायसवाल व प्रियांशी आचार्य तथा Udaipur Gazette के विपुल शर्मा का भी आयोजन में सहयोग रहा। निःशुल्क आयोजन में युवाओं और कलाप्रेमियों ने उत्साह से भाग लिया।

जगदीश चौक में दधिका मटकी फोड़ प्रतियोगिता अब 6 सितंबर को

26 फीट ऊंची मटकी क्रेन से होगी स्थापित, 8 टीमें लेंगी हिस्सा; शहीद परिवारों का होगा सम्मान
उदयपुर, 31 अगस्त:
धर्मोत्सव समिति उदयपुर की ओर से जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में 5 सितंबर को प्रस्तावित दधिका मटकी फोड़ प्रतियोगिता अब 6 सितंबर 2026, रविवार को जगदीश चौक प्रांगण में आयोजित होगी। समिति के प्रवक्ता राजेंद्र सेन ने बताया कि जगदीश मंदिर पुजारी परिषद के आग्रह पर समिति अध्यक्ष दिनेश मकवाना के साथ हुई बैठक में आयोजन की तिथि बदलने का निर्णय लिया गया।
पुजारी परिषद के अनुसार जगदीश मंदिर में 4 सितंबर को जन्माष्टमी पर्व मनाया जाएगा। 5 सितंबर को मंदिर परिसर में ढाढ़ा-ढाढीन नृत्य, भजन-कीर्तन, विशेष श्रृंगार दर्शन सहित विभिन्न कार्यक्रम होंगे।
26 फीट ऊंची होगी दधिका मटकी
6 सितंबर को सुबह 10:15 बजे पंडित नरोत्तम व्यास दधिका मटकी का विधिवत पूजन करेंगे। इसके बाद क्रेन के माध्यम से 26 फीट ऊंची मटकी को लटकाया जाएगा। शाम 6 बजे श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान देश के लिए शहीद हुए जवानों के परिवारजनों का सम्मान भी किया जाएगा।
रात 8:30 बजे मटकी फोड़ प्रतियोगिता शुरू होगी। इसमें 8 टीमें हिस्सा लेंगी और प्रत्येक टीम में 25 सदस्य होंगे। टीमों की पहचान के लिए नाम के अनुसार टी-शर्ट उपलब्ध कराई जाएगी। प्रतियोगिता के लिए तीन निर्णायक भी मौजूद रहेंगे।
आयोजन के सुचारु संचालन की जिम्मेदारी धर्मेंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व वाली टीम संभालेगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए लोकेश वैष्णव, जगदीश पुजारी, भावेश, लोकेश, हेमेंद्र पुजारी, दिलीप तंबोली, गोपाल जोशी और भेरूलाल सेठ की टीम व्यवस्था संभालेगी।

लफ़्ज़ों की महफ़िल की मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित, प्रतियोगिता के प्रतिभागी हुए सम्मानित


उदयपुर, 31 अगस्त:
शहर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था लफ़्ज़ों की महफ़िल की मासिक काव्य गोष्ठी रविवार को अशोका पैलेस के बैंक्वेट हॉल में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई।
संस्था के संस्थापक मुकेश माधवानी ने बताया कि गोष्ठी के दौरान अगस्त माह की काव्य प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान डाॅ. राजगोपालराज, द्वितीय स्थान बंशीलाल लोहार और तृतीय स्थान सुभाष अग्रवाल ने प्राप्त किया। सभी विजेताओं को ट्रॉफी एवं विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के संयोजक पं. पुरुषोत्तम शाकद्वीपीय ‘प्रेमी’ ने बताया कि गोष्ठी में पं. मनमोहन मधुकर, संजय गुप्ता देवेश , परवाना अजमेरी, रजनीकांत मनावत , सुदेश चौधरी एवं अन्य साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से सभी का मन मोह लिया । डॉ चंद्र प्रकाश चित्तौड़ा द्वारा बनाई गई गायक मुकेश जी की सूक्ष्म कृति का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. शीतल श्रीमाली द्वारा किया गया। गोष्ठी के हर अंत में सभी साहित्यकारों ने साहित्यिक परंपराओं को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

राम आस्था ही नहीं, हमारी आत्मा और आदर्श हैं : डॉ. सुरेन्द्र कटारिया

भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण में ‘लोक के राम’ विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान-विचार गोष्ठी आयोजित
उदयपुर, 31 अगस्त:
भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण, पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र उदयपुर में ‘लोक के राम’ विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान-विचार गोष्ठी आयोजित हुई। इसमें मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. सुरेन्द्र कटारिया ने कहा कि “हम सबको धोखा दे सकते हैं, किन्तु अपनी आत्मा को नहीं।” उन्होंने कहा कि राम लोकप्रिय देवता होने के साथ आस्था और नैतिकता के पर्याय हैं। राम को केवल भगवान के रूप में नहीं, बल्कि हमारी आत्मा और आदर्श के रूप में देखा गया है।
त्याग और मर्यादा के प्रतीक हैं राम
डॉ. कटारिया ने कहा कि राम सम्पूर्ण नैतिकता की पराकाष्ठा हैं और अपने आचरण से त्याग एवं मर्यादा का संदेश देते हैं। जन-जन में राम की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अभिवादन में ‘राम-राम’, मृत्यु के अवसर पर ‘राम-राम सत्य है’ तथा विभिन्न लोकोक्तियों में राम नाम का प्रयोग भारतीय लोकजीवन में उनकी गहरी उपस्थिति को दर्शाता है। ‘आया राम, गया राम’, ‘राम शरण हो गए’ और ‘मुंह में राम, बगल में छुरी’ जैसी कहावतों के माध्यम से उन्होंने लोक संस्कृति में राम के व्यापक प्रभाव को रेखांकित किया।
भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के डिप्टी डायरेक्टर निलांजन खटूआ ने बताया कि संस्थान की ओर से ‘भारत के आदिवासी एवं लोक परम्पराओं में राम-कथा’ पुस्तक वर्ष 1993 में प्रकाशित की गई थी। गोष्ठी में प्रो. हेमेंद्र द्विवेदी, प्रो. प्रेमसिंह रावलत, डॉ. योगेशचन्द्र शर्मा, डॉ. खुशपाल गर्ग, प्रो. माधव हाड़ा, डॉ. राजेन्द्र पुरोहित, डॉ. कुलशेखर व्यास और विजयसिंह चौहान ने भी विचार व्यक्त किए।

बोर्डिंग शिक्षा में नवाचार और भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने पर बनी सहमति

उदयपुर, 31 अगस्त: देश के प्रमुख आवासीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शिक्षाविदों के तीन दिवसीय महामंथन में भारतीय बोर्डिंग शिक्षा को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाने के साथ संस्कार, मूल्य आधारित शिक्षा और विद्यार्थियों के समग्र विकास को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। बोर्डिंग स्कूल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BSAI) के वार्षिक प्रिंसिपल्स कॉन्क्लेव एवं AGM-2026 में देशभर के 70 से अधिक प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालयों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
शिक्षा में तकनीक के साथ मूल्यों का समन्वय
23 से 25 अगस्त तक आयोजित सम्मेलन में आवासीय शिक्षा के भविष्य, शैक्षणिक नवाचार, नेतृत्व विकास, विद्यार्थियों के मानसिक-सामाजिक विकास और मूल्य आधारित शिक्षण को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। शिक्षाविदों ने माना कि बदलते दौर में तकनीक और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के साथ भारतीय संस्कार, अनुशासन और मानवीय मूल्यों को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाए रखना जरूरी है।
स्कूलों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर
सम्मेलन में देश के विभिन्न आवासीय विद्यालयों के बीच शैक्षणिक अनुभव, नवाचार और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करने तथा विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी। नेतृत्व क्षमता विकसित करने के साथ विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की आवश्यकता बताई गई।

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