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देवास परियोजना: 10.5 किमी सुरंग की खुदाई शुरू, उदयपुर की झीलों को दशकों तक मिलेगा पानी

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देवास परियोजना: 10.5 किमी सुरंग की खुदाई शुरू, उदयपुर की झीलों को दशकों तक मिलेगा पानी

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उदयपुर के लिए ‘वॉटर लाइफलाइन’ पर काम तेज: 10.5 किमी सुरंग खोद रही भविष्य का जलभंडार
संदीप कुमावत
उदयपुर, 8 मई:
उदयपुर शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली देवास परियोजना के तृतीय एवं चतुर्थ चरण के कार्यों ने अब जमीन पर गति पकड़ ली है। पहाड़ों में लाइट ब्लास्टिंग, हैवी पॉवर बूमर और अत्याधुनिक मशीनों की गूंज शुरू हो चुकी है। देवास तृतीय परियोजना के तहत बनने वाली 10.50 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई एक ओर से करीब 500 मीटर तक पूरी कर ली गई है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार सुरंग का अधिकांश हिस्सा नॉन-फॉरेस्ट क्षेत्र में होने से खुदाई कार्य तेजी से जारी है। इसके लिए तीन एडिट (प्रवेश मार्ग) बनाए गए हैं, जिनसे भारी मशीनें सुरंग के भीतर पहुंच रही हैं और मलबा बाहर निकाला जा रहा है। यह सुरंग आकार में आकोदड़ा सुरंग से छोटी होगी। आकोदड़ा सुरंग का आकार 5.5×5.5 मीटर है, जबकि नई सुरंग 4.5×5 मीटर आकार की बनाई जा रही है।
1690 करोड़ की परियोजना, 2029 तक लक्ष्य
देवास तृतीय एवं चतुर्थ परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma ने 1 मार्च 2024 को किया था। करीब 1690.55 करोड़ रुपए लागत वाली इस परियोजना को 44 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वन क्षेत्र से संबंधित स्वीकृतियां मिलते ही बांध निर्माण कार्य भी तेज कर दिया जाएगा।
यह परियोजना मूल रूप से पेयजल योजना है, जिसके लिए बजट जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से जल संसाधन विभाग को हस्तांतरित किया जा रहा है।
झीलें रहेंगी लबालब, पर्यटन को भी मिलेगा फायदा
परियोजना पूरी होने के बाद उदयपुर शहर की झीलों में हर वर्ष 1800 से 2000 एमसीएफटी अतिरिक्त पानी डायवर्ट किया जा सकेगा। इसके अलावा देवास प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ सहित सभी बांधों में करीब 1400 एमसीएफटी पानी रिजर्व रहेगा, जिसे जरूरत पड़ने पर पिछोला सहित अन्य झीलों में छोड़ा जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल उदयपुर की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान होगा, बल्कि झीलों का जलस्तर बनाए रखने से पर्यटन उद्योग को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
भविष्य की प्यास बुझाने की तैयारी
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने हाल ही में कहा था कि देवास तृतीय और चतुर्थ परियोजनाएं उदयपुर की आने वाली कई दशकों की पेयजल जरूरत पूरी करेंगी। अनुमान के अनुसार वर्ष 2031 तक उदयपुर की आबादी 8.75 लाख पहुंच सकती है, जिसके लिए 2397 एमसीएफटी वार्षिक पेयजल की जरूरत होगी। यह मांग 2036 तक बढ़कर 2613 एमसीएफटी होने की संभावना है।
दो नए बांध और सुरंगों का नेटवर्क
देवास तृतीय परियोजना के तहत गोगुंदा तहसील के नाथियाथल गांव के पास 703 एमसीएफटी क्षमता का बांध बनाया जाएगा। यहां से 10.50 किमी लंबी सुरंग द्वारा पानी देवास द्वितीय यानी आकोदड़ा बांध तक पहुंचाया जाएगा। वहीं देवास चतुर्थ परियोजना में आम्बावा गांव के पास 390 एमसीएफटी क्षमता का बांध बनेगा, जिसे 4.15 किमी लंबी सुरंग से देवास तृतीय से जोड़ा जाएगा।

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