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नौतपा में भी शीतल रहती है महाराणा प्रताप की ‘मायरा की गुफा’

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नौतपा में भी शीतल रहती है महाराणा प्रताप की ‘मायरा की गुफा’

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हल्दीघाटी युद्ध की रणनीति का बना था केंद्र, 42 डिग्री तापमान में भी गुफा रहती है ठंडी
उदयपुर, 28 मई:
मेवाड़ की वीरता, स्वाभिमान और संघर्ष की अमर गाथा को संजोए अरावली पर्वतमाला के बीच स्थित महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक “मायरा की गुफा” आज भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। नौतपा की भीषण गर्मी में जब उदयपुर सहित आसपास के क्षेत्रों का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब भी यह गुफा प्राकृतिक रूप से शीतल बनी रहती है। यहां का तापमान सामान्यतः 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं जाता।
इतिहासकारों के अनुसार मुगल सम्राट अकबर के विरुद्ध संघर्ष के दौरान महाराणा प्रताप ने इस गुफा का उपयोग सुरक्षित शरणस्थली और शस्त्रागार के रूप में किया था। माना जाता है कि हल्दीघाटी युद्ध की रणनीति भी इसी गुफा में तैयार की गई थी। यहां से मेवाड़ की सेना के संचालन और संगठन का कार्य भी किया जाता था।
विषय विशेषज्ञ राहुल शर्मा का कहना है कि गुफा की प्राकृतिक संरचना, मोटी चट्टानें और अंदर मौजूद प्राकृतिक वेंटिलेशन इसे गर्मियों में भी ठंडा बनाए रखते हैं। यही कारण है कि बाहर भीषण गर्मी होने के बावजूद गुफा के भीतर प्रवेश करते ही शीतलता का अनुभव होता है। स्थानीय लोग इसे “प्रकृति का वातानुकूलित कक्ष” भी कहते हैं।
मायरा की गुफा आज इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। यहां पहुंचने वाले लोग न केवल प्राकृतिक ठंडक का अनुभव करते हैं, बल्कि मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास और महाराणा प्रताप के संघर्ष को भी करीब से महसूस करते हैं।
इतिहासकारों का मानना है कि यह गुफा केवल एक प्राकृतिक स्थल नहीं, बल्कि मेवाड़ की अस्मिता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता संग्राम की अमिट पहचान है। भीषण गर्मी के दौर में भी यह ऐतिहासिक धरोहर प्रकृति और भारतीय स्थापत्य बुद्धिमत्ता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

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