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टिकट कटे तो भी धर्मपथ से नहीं हटूंगा: डॉ. विजय विप्लवी

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टिकट कटे तो भी धर्मपथ से नहीं हटूंगा: डॉ. विजय विप्लवी

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बोले- मेरा विरोध भाजपा से नहीं, भ्रष्टाचार से है; पार्टी का बोर्ड बनाना प्राथमिकता
उदयपुर, 31 अगस्त :
नगर निगम चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भाजपा से जुड़े डॉ. विजय विप्लवी ने अपने समर्थकों और शुभचिंतकों के नाम जारी बयान में कहा कि टिकट मिले या न मिले, वे अपने वैचारिक अधिष्ठान और संगठन के प्रति निष्ठा से विचलित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि उनका विरोध संगठन से कभी नहीं रहा, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से है। भाजपा का बोर्ड पुनः बनाना ही इस समय उनकी प्राथमिकता है।
डॉ. विप्लवी ने दावा किया कि वर्ष 2009, 2014, 2019 और अब 2026 में लगातार चार चुनावों में सामान्य श्रेणी का वार्ड होने के बावजूद उन्हें टिकट से वंचित करने के प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 से संगठन में उनके पास कोई दायित्व नहीं है, इसके बावजूद उन्होंने संगठन से दूरी नहीं बनाई और विचारधारा के प्रति अपनी निष्ठा कायम रखी।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार उनके वार्ड में पर्यवेक्षक के रूप में भेजे गए राजकुमार चित्तौड़ा से उनका पुराना राजनीतिक विरोध है। विप्लवी ने कहा कि टिकट कटने से ज्यादा उन्हें उस मानसिकता पर पीड़ा है, जिसमें विचार और सिद्धांतों की बजाय व्यक्तिगत पसंद-नापसंद को महत्व दिया जाता है।
ग्रीन हाउस सब्सिडी मामले में शिकायत का किया उल्लेख
डॉ. विप्लवी ने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से उनका मतभेद कथित ग्रीन हाउस सब्सिडी अनियमितताओं को लेकर की गई शिकायत के कारण है। उन्होंने दावा किया कि शिकायत के साथ दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। उन्होंने संबंधित व्यक्ति को प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों का खंडन करने की चुनौती भी दी।
उन्होंने कहा, “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” उनका सिद्धांत है। भ्रष्टाचार या अनियमितता को स्वीकार नहीं करेंगे और उसके खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके कारण भाजपा को चुनाव में कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और वे पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में संगठन के साथ खड़े रहेंगे।
पद को साधन माना, साध्य नहीं
डॉ. विप्लवी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लिए राजनीति में पद साध्य नहीं, बल्कि साधन है। उन्होंने परिवारवाद, धनबल और भू-व्यवसायियों के बढ़ते प्रभाव को लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि सत्य कहना और स्वीकार करना कठिन है, लेकिन वे धर्मपथ पर अडिग रहेंगे तथा भ्रष्टाचार और स्वेच्छाचार के विरुद्ध संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने प्रभु सांवलिया सेठ से संगठन की सेवा करते रहने और भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष का साहस देने की प्रार्थना की।

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