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पहले छह माह तक केवल मां का दूध, यही है शिशु के स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव

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पहले छह माह तक केवल मां का दूध, यही है शिशु के स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव

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विश्व स्तनपान सप्ताह पर धानमंडी स्वास्थ्य केंद्र में जागरूकता कार्यक्रम, माताओं को बताए स्तनपान के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य लाभ


उदयपुर, 5 अगस्त:
विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत बुधवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धानमंडी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को स्तनपान के महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई। चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा कि नवजात शिशु को जन्म के पहले एक घंटे के भीतर मां का दूध पिलाना शुरू कर देना चाहिए। जन्म के बाद निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए प्राकृतिक टीके की तरह काम करता है और उसे कई गंभीर संक्रमणों से बचाने में मदद करता है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक आदित्य ने बताया कि विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य माताओं में जागरूकता बढ़ाना और शिशुओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराना है। शहर प्रभारी एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कैलाश शर्मा ने कहा कि जीवन के पहले छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। इस अवधि में पानी या अन्य कोई आहार देने की आवश्यकता नहीं होती। मां के दूध में सभी आवश्यक पोषक तत्व, विटामिन और एंटीबॉडी मौजूद होते हैं, जो शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं तथा उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।
अतिरिक्त जिला नोडल अधिकारी नितिशा सैंड्रिक ने बताया कि स्तनपान केवल बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद गर्भाशय जल्दी सामान्य स्थिति में लौटता है, वजन नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है तथा स्तन और अंडाशय के कैंसर का खतरा कम होता है। साथ ही मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है। कार्यक्रम में चिकित्सा प्रभारी, आशा सहयोगिनी, एएनएम, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं ने भाग लिया।

स्तनपान से जुड़ी 5 जरूरी बातें
जन्म के पहले एक घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान शुरू कराएं।
पहले छह माह तक केवल मां का दूध दें, पानी भी नहीं।
छह माह बाद मां के दूध के साथ पूरक आहार शुरू करें।
मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु की पहली प्राकृतिक सुरक्षा ढाल है।
नियमित स्तनपान से मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता।

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