LOADING

Type to search

भारतीय ज्ञान परंपरा पर वैश्विक शोध जरूरी : राज्यपाल

Rajasthan

भारतीय ज्ञान परंपरा पर वैश्विक शोध जरूरी : राज्यपाल

Share

बागड़े बोले- दुनिया मान रही भारतीय ज्ञान का लोहा, 222 शोध पत्र हुए प्रस्तुत; एआई युग में प्राचीन ज्ञान को बताया उपयोगी
उदयपुर, 23 अगस्त:
राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े ने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक के लिए भी महत्वपूर्ण आधार है। इसके विभिन्न आयामों पर देश-दुनिया में व्यापक शोध और अध्ययन होना चाहिए। वे रविवार को पेसिफिक अकादमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मैकाले की शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
‘प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा : ज्ञान एवं विज्ञान के आधुनिक आयाम’ विषयक संगोष्ठी में राज्यपाल ने कहा कि अंग्रेजों के आगमन से पहले भारत में ज्ञान के संवर्धन के लिए करीब 8 लाख गुरुकुल, विद्यालय और आश्रम संचालित होने का उल्लेख मिलता है। उनके अनुसार लॉर्ड मैकाले की शिक्षा प्रणाली से भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और पारंपरिक कुटीर उद्योगों को नुकसान पहुंचा। उन्होंने बप्पा रावल से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग भी साझा किए।
222 शोध पत्रों का हुआ वाचन
कुलगुरु प्रो. हेमंत कोठारी ने स्थानीय ज्ञान, पवित्र ज्यामिति और आधुनिक नवाचार के संबंध पर प्रकाश डाला। समूह अध्यक्ष प्रो. बीपी शर्मा ने कहा कि प्राचीन संस्कृत वाङ्मय आधुनिक शोध के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ उपलब्ध कराता है। उन्होंने योग में दीर्घश्वसन पर हुए शोध का उल्लेख किया। ऑस्ट्रेलिया की रेबेका टेलर ने प्राचीन भारतीय मूर्तिकला, वास्तुकला और ज्यामितीय परंपराओं की आधुनिक प्रासंगिकता बताई। संगोष्ठी में 222 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. कैलाश डांगा सहित देश-विदेश के विशेषज्ञ मौजूद रहे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *