राज्यपाल बागड़े बोले- हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप हारे नहीं, मुगलों को दी कड़ी टक्कर
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जनसंख्या और नशामुक्ति पर भी रखी अपनी बात
उदयपुर, 8 अगस्त: राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध को इतिहास में महाराणा प्रताप की हार के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि महाराणा प्रताप ने मुगलों का मजबूती से मुकाबला किया और युद्ध में पराजित नहीं हुए। राज्यपाल शनिवार को उदयपुर के आरसीए कॉलेज में आयोजित उत्तर-पश्चिम क्षेत्रीय सम्मेलन ‘एग्रीविजन’ को संबोधित कर रहे थे।
‘चाटुकार इतिहासकारों ने लिखा कि प्रताप हार गए’
बागड़े ने कहा कि कुछ इतिहासकारों ने महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी के युद्ध में हारा हुआ बताया। उन्होंने सवाल किया कि यदि प्रताप वास्तव में हार गए होते तो क्या वे अकबर को नियमित रूप से कर या चंदा देते? उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ और महाराणा प्रताप ने मेवाड़ के स्वाभिमान से समझौता नहीं किया।
किरण देवी का प्रसंग सुनाया
राज्यपाल ने बीकानेर की किरण देवी का प्रसंग सुनाते हुए दावा किया कि मीना बाजार में अकबर ने छद्मवेश में उनके साथ अभद्रता का प्रयास किया था। उनके अनुसार किरण देवी ने साहस दिखाते हुए अकबर का मुकाबला किया और उसे माफी मांगनी पड़ी। राज्यपाल ने इसे नारी शक्ति का उदाहरण बताया।
‘आबादी बढ़ रही है तो बढ़ने दो’
जनसंख्या को लेकर बागड़े ने कहा कि भारत की आबादी बढ़ रही है, लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि देश बड़ी आबादी को बोझ नहीं मानता। चीन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां जनसंख्या को लेकर प्रतिबंध लगाए गए थे, जिन्हें बाद में वापस लेना पड़ा।
नशामुक्ति पर भी सख्त रुख
राज्यपाल ने युवाओं को नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशा करने वालों को पहले समझाइश दी जानी चाहिए। सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसरों के नशा करने की शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि समझाइश से बात नहीं बनी तो सख्ती से नशामुक्त कराने के प्रयास किए जाएंगे।
कृषि को तकनीक और उद्यमिता से नई ताकत दें युवा
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि कृषि और इससे जुड़े संबद्ध व्यवसाय भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं और आज भी देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति में इनकी अहम भूमिका है। युवाओं को कृषि को केवल परंपरागत व्यवसाय नहीं मानकर आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, स्टार्टअप, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जोड़ना चाहिए। इससे रोजगार और समृद्धि के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में कृषि, प्रकृति, गणित और खगोल विज्ञान से जुड़े अनेक वैज्ञानिक प्रयोग हुए हैं। युवाओं को इस विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर नए प्रयोग करने चाहिए।

