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मां की सूनी आंखों में ठहरी उम्मीद, माही किनारे बस एक पुकार—‘मेरा बेटा लौटा दो’

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मां की सूनी आंखों में ठहरी उम्मीद, माही किनारे बस एक पुकार—‘मेरा बेटा लौटा दो’

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उदयपुर, 6 मई: बांसवाड़ा जिले की माही नदी किनारे एक मां मंदिर की सीढ़ियों पर बैठी है… आंखें नदी की धार पर टिकी हैं, जैसे हर लहर में अपने 8 साल के बेटे की झलक खोज रही हो। उसकी सिसकियों में सिर्फ एक ही दर्द बार-बार उभरता है—“मेरा बेटा ढूंढ कर ला दो… मेरा इकलौता सहारा था…” मंगलवार को नाव हादसे में लापता हुए मासूम मानव का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है, लेकिन मां की उम्मीद अब भी टूटी नहीं है।


नदी में समाई मासूम की हंसी
अरथूना थाना क्षेत्र के भैंसाउ गांव में मंगलवार दोपहर नाव पलटने से यह हादसा हुआ। नाव में सवार 11 में से 9 लोग तैरकर बाहर आ गए, लेकिन 8 वर्षीय मानव और 21 वर्षीय जयेश नदी में समा गए। मानव अपने मामा के साथ संगमेश्वर महादेव के दर्शन करने आया था—किसे पता था यह यात्रा आखिरी बन जाएगी।


परिवार की टूटती उम्मीदें
पिता नाथू हाथ जोड़कर प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं—“मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस मेरा बेटा मिल जाए…” वहीं जयेश की मां सविता की चीखें हर किसी का दिल चीर रही हैं—“मेरे बेटे को ढूंढो… वह लौट आए…”
SDRF और सिविल डिफेंस की टीमें लगातार तलाश में जुटी हैं, मगर नदी की गहराई और तेज बहाव बड़ी चुनौती बनी हुई है। हर गुजरता पल परिजनों के लिए सदियों जैसा लग रहा है।
‘हम चिल्लाते रहे, कोई नहीं आया’
प्रत्यक्षदर्शी लोकेश तीरगर ने बताया—“नाव अचानक झुकी और पलट गई। हम मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन कोई आगे नहीं आया। जिन्हें तैरना आता था वे बच गए… बाकी नदी में समा गए।” उसने यह भी कहा कि नाविक खुद बचकर निकल गया और पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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