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मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान में गड़बड़ी

Rajasthan

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान में गड़बड़ी

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वन विभाग के 49.50 लाख के कार्यों पर उठे सवाल
आरोप: बिना टेंडर 21 एमपीटी और 8 सीसीपीटी निर्माण कराए, आधा भुगतान भी जारी
जुगल कलाल
डूंगरपुर, 6 अगस्त:
राजस्थान सरकार जहां विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही का दावा कर रही है, वहीं डूंगरपुर जिले के आसपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत कराए गए निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि वन विभाग ने करीब 49.50 लाख रुपए के निर्माण कार्य बिना नियमानुसार ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाए करा दिए और उनका लगभग 50 प्रतिशत भुगतान भी जारी कर दिया गया।
29 कार्यों में टेंडर प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत आसपुर क्षेत्र में 21 एमपीटी (Moisture Preservation Trench) और 8 सीसीपीटी (Continuous Contour Pit Trench) निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए थे। इन कार्यों के लिए डूंगरपुर वन विभाग को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया था।
सूत्रों का दावा है कि मशीनों से कराए जाने वाले इन कार्यों के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य थी, लेकिन विभाग ने निविदा जारी किए बिना ही कार्य पूरे करा दिए। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो सरकार को 10 से 12 लाख रुपए तक के संभावित राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
हरियाणा के ठेकेदार से मशीनों के जरिए कराए गए कार्य
सूत्रों के मुताबिक विभाग ने हरियाणा के एक ठेकेदार को बुलाकर मशीनों के माध्यम से निर्माण कार्य करवाए। आरोप है कि कार्य पूर्ण होने के बाद नाका समितियों के जरिए करीब आधा भुगतान भी जारी कर दिया गया, जबकि शेष भुगतान की प्रक्रिया जारी है। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि समितियों का उपयोग केवल भुगतान प्रक्रिया को औपचारिक रूप से पूरा करने के लिए किया गया।
रेंज से डिवीजन स्तर तक मिलीभगत के आरोप
मामले में आसपुर रेंज के रेंजर सोनल मीणा और साइट इंचार्ज पदम मीणा की भूमिका भी चर्चा में है। सूत्रों का कहना है कि रेंज से लेकर डिवीजन स्तर तक अधिकारियों की सहमति से पूरा काम कराया गया। कार्य पूर्ण होने के बाद माप पुस्तिका (एमबी) भरकर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई। वन विभाग की व्यवस्था के अनुसार भुगतान नाका समितियों के माध्यम से किया जाता है, जिसमें समिति अध्यक्ष, सचिव और संबंधित रेंजर की स्वीकृति आवश्यक होती है।
निर्माण गुणवत्ता और योजना के उद्देश्य पर भी सवाल
एमपीटी और सीसीपीटी संरचनाओं का उद्देश्य वर्षा जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और वन क्षेत्रों में नमी बनाए रखना है। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर तकनीकी मानकों की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से निर्माण किया गया, जिससे योजना के मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकते हैं।
रेंजर का दावा- डिवीजन कार्यालय से मिले थे निर्देश
आसपुर रेंज के रेंजर सोनल मीणा ने कहा कि उन्होंने कार्यों का शेड्यूल बनाकर डिवीजन कार्यालय भेजा था। वहां से उन्हें समितियों के माध्यम से कार्य कराने के निर्देश मिले थे। हालांकि संबंधित लिखित आदेश के बारे में पूछे जाने पर वे कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
विधायक उमेश डोमार ने मांगी निष्पक्ष जांच
आसपुर विधायक उमेश डोमार ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्यों में किसी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब आदिवासी लोगों के नाम पर गठित समितियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोप सही पाए गए तो मामला विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाया जाएगा। साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
जांच हुई तो कई सवालों के जवाब तलाशने होंगे
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कार्य मशीनों से कराए गए तो ई-टेंडर प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई? नाका समितियों के माध्यम से भुगतान किस आधार पर स्वीकृत किया गया? और क्या सरकारी नियमों का पालन किया गया या नहीं? इन सवालों के जवाब अब संभावित जांच पर निर्भर करेंगे।

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