घर-घर पूजे ईशर-गणगौर, शाम को निकलीं पारंपरिक सवारियां
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महिलाओं में दिखा खासा उत्साह
उदयपुर, 22 मार्च: झीलों की नगरी उदयपुर में चैत्र शुक्ल तृतीया के अवसर पर गणगौर का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सोमवार को सुबह जहां घर-घर में ईशर और गणगौर माता की पारंपरिक पूजा-अर्चना हुई, वहीं शाम को विभिन्न समाजों द्वारा भव्य सवारियां निकाली गईं।
पूजा को लेकर बालिकाओं से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक में भारी उत्साह देखा गया। महिलाओं ने स्वयं 16 श्रृंगार किया और साथ ही मिट्टी की गणगौर माता को भी आटे और बेसन से बने पारंपरिक आभूषण (अंगूठी-जेवर) पहनाकर सजाया।
वॉलसिटी के रावजी का हाटा, भट्टीयानी चौहट्टा, जगदीश चौक, चांदपोल, घंटाघर और कुम्हारवाड़ा सहित शहर के हर मोहल्ले में गणगौर पूजन की धूम रही। पूजा के दौरान “गौर ए गणगौर माता खोल किवाड़ी…” और “ईशर पूजे पार्वती…” जैसे पारंपरिक गीत गाए गए। पूजन के बाद महिलाओं ने अपने से बड़ी बुजुर्ग महिलाओं के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
गणगौर घाट पर जल कसूम्बे
शाम को विभिन्न समाजों की ओर से गाजे-बाजे के साथ गणगौर की सवारी निकाली गई। इन सवारियों को पिछोला झील के गणगौर घाट ले जाया गया, जहां माता को जल कसूम्बे दिए गए। इसके बाद शोभायात्रा के रूप में माता को वापस अपने स्थानों (थानों) पर विराजित किया गया। मंगलवार और बुधवार को भी यह सवारियां निकाली जाएंगी।
