उदयपुर पहुंचे जैन मुनि आचार्य आदित्य सागर, बोले- बिना संस्कार का जीवन घुन लगे गेहूं जैसा
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दिखावे वाली शादियों, मोबाइल की लत और भोगवादी जीवनशैली पर साधा निशाना, चार माह उदयपुर में करेंगे चातुर्मास
उदयपुर, 11 जुलाई: धोल की पाटी स्थित जैन मंदिर में जैन मुनि आचार्य आदित्य सागर का मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर उन्होंने समाज में बढ़ती कुरीतियों, संस्कारों के क्षरण और दिखावे की प्रवृत्ति पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने घोषणा की कि आगामी चार माह वे उदयपुर में ही चातुर्मास करेंगे।
मीडिया से बातचीत में आचार्य आदित्य सागर ने कहा कि आज का व्यक्ति मोबाइल और सोशल मीडिया में इतना व्यस्त हो गया है कि उसे खुद से संवाद करना भी पसंद नहीं रहा। बच्चों को कम उम्र में पढ़ाई के लिए घर से दूर भेजने से उनमें अकेलापन और अनुशासनहीनता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में चरित्र और संस्कार नहीं हैं तो इंसान घुन लगे गेहूं की तरह है, जिसे पीसने पर आटा नहीं बल्कि कचरा ही निकलता है।
उन्होंने कहा कि संस्कार शिविरों के माध्यम से बच्चों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकांश बच्चों पर इन शिविरों का अच्छा प्रभाव पड़ता है और यही प्रयास समाज के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
आचार्य ने शादियों में बढ़ते दिखावे और फिजूलखर्ची पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 25-25 व्यंजन और भव्य आयोजनों की होड़ ने सामाजिक और आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है। महंगी शादियां करने वाले लोग बाद में कर्ज और तनाव से घिर जाते हैं। उन्होंने सादगीपूर्ण विवाह और सामूहिक वैवाहिक स्थलों के निर्माण की वकालत की।
उन्होंने कहा कि जो भाग्य में लिखा है, वही होना है, इसलिए दिखावे और आडंबर की दौड़ से बाहर निकलकर संस्कार, सादगी और मानवीय मूल्यों को अपनाने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने त्याग, तपस्या और सादगी को ही सच्चे साधु जीवन का आधार बताते हुए भोगवादी जीवनशैली पर भी तीखा प्रहार किया।
