पिछोला में गिरता गंदा पानी देख झील प्रेमी चिंतित, प्रदूषण रोकने की उठाई मांग
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घटते जलस्तर के बीच जल गुणवत्ता पर संकट, श्रीराम घाट पर आयोजित झील संवाद में सीवेज प्रबंधन और नियमित निगरानी पर जोर
उदयपुर, 1 नवंबर: झीलों की नगरी उदयपुर की जीवनरेखा पिछोला में एक ओर जलस्तर घट रहा है, वहीं दूसरी ओर श्रीराम घाट से गंदे पानी का प्रवेश झील की जल गुणवत्ता के लिए चिंता बढ़ा रहा है। घटते जल भंडार के बीच प्रदूषण की समस्या ने पेयजल सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मुद्दे पर रविवार को श्रीराम मंदिर परिसर में आयोजित झील संवाद में झील विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताते हुए प्रदूषण के स्रोतों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
झील एवं नदी विशेषज्ञ डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि झील केवल जल भंडार नहीं, बल्कि जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है। इसमें अनुपचारित सीवेज का प्रवेश जल गुणवत्ता और जलीय जीवन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि पिछोला कोई ऐसा फिल्टर नहीं है, जिसमें लगातार गंदगी डालकर स्वच्छ पानी की उम्मीद की जाए। झील के जलस्तर, गुणवत्ता और प्रदूषण संबंधी आंकड़े नियमित रूप से सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि संरक्षण के प्रयास घाटों की सफाई और सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रहने चाहिए। पूरे जलग्रहण क्षेत्र, नालों और सीवेज नेटवर्क का समन्वित प्रबंधन जरूरी है।
सामाजिक कार्यकर्ता नंदकिशोर शर्मा ने जल संरक्षण के साथ प्रदूषण रोकने को सामूहिक जिम्मेदारी बताया। शिक्षाविद् कुशल रावल ने कहा कि केवल पेयजल शोधन संयंत्रों पर निर्भर रहने के बजाय प्रदूषण के स्रोत पर ही रोक लगानी होगी। विनोद कुमावत ने बताया कि जलस्तर घटने पर समान मात्रा में प्रदूषक पहुंचने से उसकी सांद्रता बढ़ सकती है। वरिष्ठ नागरिक ध्रुपद सिंह ने नालों और सीवेज लाइनों की नियमित निगरानी तथा समयबद्ध कार्रवाई की मांग की।
झील संवाद में निष्कर्ष निकला कि पिछोला के संरक्षण के लिए जल की मात्रा के साथ गुणवत्ता पर भी समान ध्यान देना होगा। श्रीराम घाट सहित गंदे पानी के प्रवेश वाले बिंदुओं की पहचान कर प्रदूषण रोकने और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की जरूरत है।

