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78 साल बाद भी अंधेरे में जिंदगी

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78 साल बाद भी अंधेरे में जिंदगी

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3 किमी दूर जाकर 10 रुपए में चार्ज होता मोबाइल, बिजली के बिना गांवों में थमी तरक्की
बांसवाड़ा, 19 मई:
देश डिजिटल इंडिया और आधुनिक विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन बांसवाड़ा जिले की कुछ बस्तियां आज भी अंधेरे में जिंदगी बिताने को मजबूर हैं। आजादी के 78 साल बाद भी यहां बिजली नहीं पहुंच सकी है। हालत यह है कि ग्रामीणों को मोबाइल चार्ज करवाने के लिए तीन किलोमीटर दूर बाजार जाना पड़ता है, जहां 10 रुपए देकर फोन चार्ज कराया जाता है।
घाटोल तहसील की मियासा पंचायत के वाणियावेला और मुडासेर पंचायत की सिंहपुरा बस्ती के 150 से अधिक घर अब भी बिजली सुविधा से वंचित हैं। शाम ढलते ही यहां चिमनियों की रोशनी ही सहारा बनती है। पंखा, कूलर, टीवी और फ्रिज जैसी सुविधाएं ग्रामीणों के लिए अब भी सपना बनी हुई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 10वीं के बाद उन्हें बाहर पढ़ने भेजना पड़ता है। यही नहीं, दूसरे गांवों के लोग यहां अपनी बेटियों के रिश्ते करने से भी कतराते हैं।
वर्ष 2022-23 में यहां सोलर सिस्टम लगाए गए थे, लेकिन एक साल में बैटरियां खराब हो गईं। बाद में गांवों को सोलर इलेक्ट्रिफाइड घोषित होने के कारण सौभाग्य योजना का लाभ भी नहीं मिल पाया।
एवीवीएनएल के एसई भगवान दास बैरवा ने बताया कि गांवों में जल्द एलटी लाइन खिंचवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि लोगों को स्थायी राहत मिल सके।

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