महाराणा प्रताप की कृषि नीति आज भी प्रासंगिक: डॉ. मेहता
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पर्यावरण संरक्षण और कृषि विरासत के पुनरुद्धार का आह्वान, राष्ट्र चेतना सभा की तैयारियां तेज
उदयपुर, 7 जून : वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की कृषि, पर्यावरण और जल संरक्षण संबंधी दूरदर्शी नीतियां आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। यह बात पर्यावरणविद डॉ. अनिल मेहता ने प्रताप गौरव केंद्र में आयोजित संगोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि दिवेर विजय के बाद महाराणा प्रताप ने युद्धग्रस्त मेवाड़ के पुनर्निर्माण के लिए कृषि, फलोत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया था। संगोष्ठी में प्रताप गौरव शोध केंद्र के अधीक्षक डॉ. विवेक भटनागर ने बताया कि महाराणा प्रताप ने गुजरात, मारवाड़ और मालवा से कृषक समुदायों को बसाकर कृषि विकास को बढ़ावा दिया। वक्ताओं ने पंडित चक्रपाणि मिश्र रचित ‘विश्ववल्लभ’ ग्रंथ को मध्यकालीन भारत का महत्वपूर्ण कृषि एवं पर्यावरण शास्त्र बताया। कार्यक्रम के बाद प्रताप गौरव केंद्र परिसर में नीम, महुआ, पलाश, गूलर और गुग्गल सहित स्थानीय प्रजातियों के पौधे रोपे गए। इस दौरान पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। वहीं 17 जून को महाराणा भूपाल स्टेडियम में होने वाली राष्ट्र चेतना संकल्प सभा की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।
