सुविवि में महर्षि वेदव्यास जयंती एवं गुरुपूर्णिमा महोत्सव आयोजित
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गुरुजनों का सम्मान, वक्ताओं ने कहा— गुरु वंदन ज्ञान परंपरा के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक
उदयपुर, 29 जुलाई: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय की ओर से मंगलवार को स्वर्ण जयंती अतिथिगृह स्थित बप्पारावल सभागार में महर्षि वेदव्यास जयंती एवं गुरुपूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “महर्षि वेदव्यास एवं भारत-भारती” रहा, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरु-शिष्य संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा थे, जबकि अध्यक्षता महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. नीरज शर्मा ने की। इस अवसर पर राज्यपाल के सलाहकार एवं पूर्व कुलगुरु प्रो. कैलाश सोडानी, पूर्व कुलगुरु प्रो. इंद्रवर्द्धन त्रिवेदी, प्रो. उमाशंकर शर्मा तथा प्रो. दरियाव सिंह चुंडावत का मेवाड़ी पगड़ी, अंगवस्त्र, श्रीफल और अभिनंदन पत्र देकर सम्मान किया गया। विद्यार्थियों ने भी गुरुजनों का तिलक कर अभिनंदन किया।
कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा ने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने वेदों का संकलन और महाभारत की रचना कर भारतीय संस्कृति को अमर आधार दिया। उन्होंने कहा कि गुरुपूर्णिमा ज्ञान की निरंतर प्रवाहित होने वाली परंपरा का उत्सव है। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. नीरज शर्मा ने कहा कि “गुरुजन-वंदन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि ज्ञान परंपरा के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है।”
प्रो. कैलाश सोडानी, प्रो. इंद्रवर्द्धन त्रिवेदी, प्रो. उमाशंकर शर्मा और प्रो. दरियाव सिंह चुंडावत ने भी भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध और सांस्कृतिक मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुंजन आचार्य ने किया तथा रजिस्ट्रार डॉ. बी.सी. गर्ग ने आभार व्यक्त किया। समारोह में बड़ी संख्या में प्राध्यापक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
