LOADING

Type to search

शिल्पग्राम में गूंजी प्रभात रागों की स्वर लहरियां

Local

शिल्पग्राम में गूंजी प्रभात रागों की स्वर लहरियां

Share


उदयपुर, 27 जून: पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर एवं संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार सुबह शिल्पग्राम में आयोजित ‘स्वर-प्रभात’ समारोह में प्रभातकालीन रागों की मधुर प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उगते सूर्य की पहली किरणों के साथ शुरू हुए इस आयोजन में कर्नाटक संगीत, सारंगी वादन और पारंपरिक हवेली संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। केंद्र के निदेशक डॉ. अश्विन महेश दलवी ने कहा कि प्रभातकालीन राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की अमूल्य धरोहर हैं, जो मन में शांति और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं। अहमदाबाद के प्रसिद्ध कर्नाटक गायक जयन नायर ने राग रेवगुप्ती, गौरी मनोहारी, पीलू और सिंधु भैरवी की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। इसके बाद उदयपुर के सारंगी वादक भगवती प्रसाद ब्यावत ने राग बिलासखानी तोड़ी और भैरवी से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। समापन प्रस्तुति में आचार्य गोस्वामी रणछोड़लाल ने पारंपरिक हवेली संगीत के माध्यम से राग भैरव, रामकली और कालिंगड़ा की मनोहारी प्रस्तुति दी। समारोह के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *