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कला, इतिहास और आधुनिकता के संगम से दिवेर विजय महोत्सव में जीवंत हुआ मेवाड़ का शौर्य

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कला, इतिहास और आधुनिकता के संगम से दिवेर विजय महोत्सव में जीवंत हुआ मेवाड़ का शौर्य

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राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला में 20 कलाकारों ने उकेरा मेवाड़ का ऐतिहासिक परिदृश्य, फोटो वॉक और हॉवरबोर्ड बने आकर्षण
उदयपुर, 21 सितम्बर:
प्रताप गौरव केंद्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ में 16 सितंबर से चल रहे दस दिवसीय दिवेर विजय महोत्सव के तहत सोमवार को कला, इतिहास, संस्कृति और आधुनिक अभिव्यक्ति का संगम देखने को मिला। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला, प्रताप गौरव केंद्र और संस्कार भारती उदयपुर महानगर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें विभिन्न राज्यों के 20 चित्रकारों ने भाग लिया।
कार्यशाला का विषय ‘मेवाड़ का सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक परिदृश्य’ रहा। मुख्य अतिथि कुलगुरु कैलाश डागा ने कहा कि मेवाड़ की वीरगाथाओं को कैनवास पर साकार करने वाले कलाकार भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का कार्य कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के चित्रकार अंकुश कुमार ने लाइव आर्ट डिमॉन्स्ट्रेशन में महाराणा प्रताप का चित्र बनाकर दर्शकों को आकर्षित किया।
महोत्सव में पहली बार आयोजित दो दिवसीय फोटो एवं रील मेकिंग वॉक में युवाओं ने केंद्र के परिसर और ऐतिहासिक परिवेश को कैमरों व स्मार्टफोन में कैद किया। वहीं 21 सितंबर से इलेक्ट्रिक हॉवरबोर्ड राइड शुरू की गई। 26 सितंबर तक 15 मिनट की राइड के लिए 100 रुपए शुल्क रखा गया है।
हिरण मगरी सेक्टर-4 चौराहे पर ‘दिवेर का रणघोष’ नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया गया। मंगलवार शाम पानेरियों की मादड़ी स्थित वानरेश्वर महादेव मंदिर में इसका मंचन होगा।

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