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घर में बड़ों का आदर करेंगे तभी घर स्वर्ग बनेगा: पुष्कर दास महाराज

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घर में बड़ों का आदर करेंगे तभी घर स्वर्ग बनेगा: पुष्कर दास महाराज

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डोरे नगर में चल रही रामकथा की पूर्णाहुति मंगलवार को होगी
उदयपुर, 13 अप्रेल:
सर्वेश्वर महादेव मंदिर,डोरे नगर,सेक्टर 3 में श्री राम दरबार प्राण प्रतिष्ठा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर पाटोत्सव के उपलक्ष्य में संगीतमय रामकथा के छठे दिन पुष्कर दास महाराज ने कहा व्यासपीठ का हर शब्द काम का होता है। रामायण का शब्द ग्रहण करेंगे तो जीवन में फायदा होगा। परमात्मा के निकट जो हमारा जीवन गुजरता हे वही सार्थक है, बाकी जीवन यापन,मान, प्रतिष्ठा, में जो समय गुजर रहा वो प्रभु भक्ति में कोई मायने नहीं रखता। आगे कहा पंचवटी का मतलब पांच तत्व का पुतला, किसी को आदर देना वो सबसे बड़ी पूजा है । भक्ति प्राप्त होती हे सत्संग में, संत मिलते है सत्संग से, चौपाई प्रथम भगति संतन कर संगा रामकथा के सार को समझने की जरूरत है। महाराज ने कहा सभी को नित्य रामायण का पाठ करना चाहिए, हम कोई भी सत्कर्म, पूजा, पाठ करते हे परन्तु जब तक सत्संग में नहीं बैठेंगे तब तक सत्कर्म की विधि का ज्ञान नहीं हो सकता। कथा को आगे बढ़ाते हुए शबरी का प्रसंग और नवधा भक्ति की चर्चा करते हुए राम सुग्रीव की मित्रता और बाली के वध का वर्णन किया। सुंदरकांड की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रभु भक्ति के बिना जीवन कभी सुंदर नहीं हो सकता इसलिए रावण सीता रूपी भक्ति को लंका में ले गया और सबका उद्धार किया । रावण उच्च कुल का बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति था , शास्त्रों का सही तत्वार्थ नहीं समझने के कारण हम रामायण के सभी पात्रो को समझने में भूल कर जाते है । अध्यात्म मार्ग में शास्त्रों के अर्थ समझने के लिए सत्संग करना पड़ता है, शास्त्र पढ़ने में और सत्संग करने में बहुत बड़ा अंतर है।
कथा के अंत में संयोजक विठ्ठल वैष्णव व गोपाल सैनी ने बताया कि रामकथा की पूर्णाहुति मंगलवार प्रातः: 10 से 1 बजे मध्य महाआरती के साथ होगी। इसी दिन भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर का पाटोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाएगा।
डॉ. रमेश पटेल ने TAVI (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन) के इंडिकेशन्स एवं आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। साथ ही कॉन्फ्रेंस में इस बात पर भी चर्चा हुई कि क्या चिकित्सक सामान्य जनसंख्या की तुलना में अधिक जोखिम में हैं और नियमित स्क्रीनिंग की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
वहीं “मेटाबॉलिक डिजीज को मोटापे के दृष्टिकोण से पुनर्विचार” विषय पर भी महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए गए।
डॉ. संजय गांधी (हार्ट सर्जरी विभाग के एच.ओ.डी.) ने एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (AVR) मरीजों के लाइफटाइम मैनेजमेंट एवं नई तकनीकों के प्रभाव पर प्रकाश डाला।
डॉ. दिलीप जैन द्वारा “सर्जिकल स्किल और तकनीक का समन्वय” विषय पर चर्चा करते हुए एक रोचक डिबेट भी आयोजित की गई, जिसमें एक्यूट मायोकार्डियल इंफार्क्शन (हार्ट अटैक) के प्रबंधन में मेडिकल एवं इंटरवेंशनल तरीको पर विचार-विमर्श हुआ।
यह कॉन्फ्रेंस न केवल चिकित्सकों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध हुई, बल्कि हृदय रोगों के बेहतर प्रबंधन और जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुई।

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