भूदान भूमि का गलत नामांतरण करने वाला पटवारी बर्खास्त
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हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद नामांतरण दर्ज करने का आरोप प्रमाणित; तत्कालीन कार्यवाहक नायब तहसीलदार की एक-तिहाई पेंशन स्थायी रूप से रोकी
उदयपुर, 21 अगस्त: भूदान यज्ञ बोर्ड की भूमि का नियमों के विपरीत निजी व्यक्ति के पक्ष में नामांतरण करने और लंबित न्यायिक विवाद की अनदेखी करने के मामले में जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने कड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होने पर पटवारी पटवार मंडल सनवाड़ देवेंद्र प्रजापत को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं तत्कालीन कार्यवाहक नायब तहसीलदार दयाराम सुथार की देय पेंशन का एक-तिहाई हिस्सा स्थायी रूप से रोकने के आदेश दिए गए हैं।
2023 में दर्ज किया नामांतरण
मामला मावली तहसील के सनवाड़ गांव की भूदान भूमि से जुड़ा है। जांच के अनुसार भूमि पहले निजी नाम पर थी, जिसे 2009 में भूदान यज्ञ बोर्ड के नाम दर्ज किया गया था। इस कार्रवाई के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में रिट याचिका लंबित थी। इसके बावजूद 29 सितंबर 2023 को भूमि पूरणमल पुत्र बाबूलाल पहाड़िया के पक्ष में आवंटित हुई और पटवारी ने 1 दिसंबर 2023 को ई-धरती पर नामांतरण संख्या 6545 दर्ज कर दिया। 4 दिसंबर को तत्कालीन कार्यवाहक नायब तहसीलदार ने इसे स्वीकार कर लिया। विभागीय जांच में सामने आया कि नामांतरण से पहले प्रकरण की समुचित जांच नहीं की गई तथा नियमों और उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी हुई। जांच में गैर-आवंटी को खातेदारी अधिकार देने और लंबित न्यायिक विवाद की उपेक्षा के आरोप भी प्रमाणित हुए।
19 अगस्त को बर्खास्तगी आदेश
पटवारी को जनवरी 2024 में निलंबित किया गया था। बाद में वह बहाल हुआ। विस्तृत विभागीय जांच के बाद जिला कलक्टर ने राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत 19 अगस्त 2026 को बर्खास्तगी का आदेश जारी किया। नायब तहसीलदार की पेंशन का एक-तिहाई हिस्सा स्थायी रूप से रोकने के आदेश भी दिए गए।

