मानगढ़ धाम पर सियासत तेज, कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा
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रघुवीर सिंह मीणा बोले- राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं देना 1500 आदिवासी शहीदों का अपमान
उदयपुर, 5 अगस्त: राजस्थान-गुजरात सीमा पर स्थित ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित नहीं किए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। उदयपुर के पूर्व सांसद एवं कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता रघुवीर सिंह मीणा ने केंद्र सरकार के रुख को आदिवासी समाज और मानगढ़ के शहीदों का अपमान बताते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संसद में दिए गए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री के जवाब से भाजपा की कथनी और करनी का अंतर उजागर हो गया है।
रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि मानगढ़ धाम, जिसे ‘राजस्थान का जलियांवाला बाग’ भी कहा जाता है, आजादी के आंदोलन में लगभग 1500 आदिवासी शहीदों की बलिदान स्थली है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के मानगढ़ दौरे के दौरान इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की थी, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने योग्य नहीं माना। उन्होंने आदिवासी सांसदों से भी इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाने की अपील की।
ताराचंद मीणा बोले- आदिवासियों को उनका सम्मान दिलाकर रहेंगे
उदयपुर लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे ताराचंद मीणा ने कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और स्वतंत्रता संग्राम के बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आदिवासी सम्मान की बात तो करती है, लेकिन निर्णयों में उसकी प्राथमिकता नजर नहीं आती। कांग्रेस इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रखेगी और मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिलाने की मांग उठाती रहेगी।
पूर्व मंत्री महेंद्रजीत मालवीय बोले- आदिवासी समाज अब आर-पार की लड़ाई लड़ेगा, मानगढ़ पर कांग्रेस का प्रदर्शन
बांसवाड़ा, 5 अगस्त: मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित नहीं किए जाने के विरोध में कांग्रेस के आदिवासी नेता एवं पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय के नेतृत्व में बुधवार को मानगढ़ धाम पर प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मालवीय ने कहा कि मानगढ़ धाम आदिवासी समाज के बलिदान, स्वाभिमान और आजादी के संघर्ष का प्रतीक है, लेकिन बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब आदिवासी समाज इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई लड़ेगा।
मालवीय ने कहा कि प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के मानगढ़ धाम दौरे के बाद समाज को उम्मीद जगी थी कि इस ऐतिहासिक स्थल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलता तो वर्ष 1913 में अंग्रेजों की गोलियों से शहीद हुए हजारों आदिवासियों के बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलता।
पूर्व मंत्री ने सांसद हनुमान बेनीवाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने संसद में यह मुद्दा मजबूती से उठाया, जबकि बांसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज की भावनाओं के अनुरूप प्रभावी पैरवी नहीं कर सके। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि फिलहाल मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
मालवीय ने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भारत सरकार के संग्रहालय विभाग से मानगढ़ का ऐतिहासिक रिकॉर्ड मंगवाया गया था और शहीद स्मारक के निर्माण के लिए तीन करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। उन्होंने कहा कि अब आदिवासी समाज एकजुट होकर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिलाने तक अपना आंदोलन जारी रखेगा।

