सुखाड़िया विवि के गेस्ट फैकल्टी इंटरव्यू में ‘जोधपुर पैनल’ पर सवाल
Share
10 विषयों के साक्षात्कार में जोधपुर के शिक्षाविदों की भागीदारी, मानदेय-भत्ते भी दिए; एक विशेषज्ञ को तीन विषयों की जिम्मेदारी
उदयपुर, 9 अक्टूबर : मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति के लिए अपनाई गई साक्षात्कार प्रक्रिया में अब विशेषज्ञों के चयन और उन पर हुए खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, 10 विषयों के साक्षात्कार में जोधपुर के शिक्षाविदों को विशेषज्ञ के रूप में बुलाया गया। उन्हें मानदेय और भत्तों का भुगतान भी किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि विशेषज्ञों के चयन के लिए क्या मानदंड अपनाए गए और दूसरे शहरों के शिक्षाविदों को पैनल में कितनी जगह मिली।
मामले में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा के मूलतः जोधपुर निवासी होने का तथ्य भी चर्चा में है। हालांकि, केवल इस समानता के आधार पर किसी अनुचित प्राथमिकता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन विशेषज्ञों के चयन की प्रक्रिया और पैनल गठन का आधार स्पष्ट होना जरूरी है।
एक विशेषज्ञ, तीन विषयों की जिम्मेदारी
आरटीआई दस्तावेजों के अनुसार, आर्ट्स कॉलेज में जोधपुर के प्रो. महिपाल सिंह को हिंदी, राजस्थानी और पत्रकारिता एवं जनसंचार—तीन विषयों के साक्षात्कार के लिए विशेषज्ञ बनाया गया। राजनीति विज्ञान के साक्षात्कार में डॉ. रमसिंह आड़ा की भागीदारी का भी उल्लेख है। तीन अलग-अलग विषयों के लिए एक ही विशेषज्ञ की नियुक्ति किन शैक्षणिक योग्यताओं और मानदंडों के आधार पर हुई, यह स्पष्ट किया जाना बाकी है।
मानदेय और भत्तों का भी भुगतान
दस्तावेजों के अनुसार डॉ. हेमाराम, डॉ. अनिल भंडारी, डॉ. महिपाल सिंह और डॉ. आर.डी. पंकज को 2,000 रुपए मानदेय और 600 रुपए भत्ते का भुगतान किया गया। कॉमर्स एवं व्यवसायिक अर्थशास्त्र विभाग में प्रो. सुनील मेहता को 7,750 रुपए दिए गए। विधि महाविद्यालय ने आरटीआई के जवाब में बताया कि बाहरी विशेषज्ञों को बुलाने और यात्रा व्यय की व्यवस्था विश्वविद्यालय प्रशासन के स्तर पर की गई। मामले में उच्च शिक्षा मंत्री और राज्यपाल तक शिकायत पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है। शिकायत में चयन प्रक्रिया और खर्च की जांच की मांग की गई है। अब विशेषज्ञों के चयन का आधार, पैनल गठन के नियम और विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।

