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भ्राता भरत को समझाया, पर केवट के आगे हारे राम

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भ्राता भरत को समझाया, पर केवट के आगे हारे राम

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राम—केवट संवाद में छलछलाईं भक्तों की आंखें
निम्बार्क कॉलेज रामलीला प्रांगण में बह रही है रामभक्ति की सरिता
उदयपुर, 14 अक्टूबर।
झीलों की नगरी उदयपुर में श्रीराम लीला समिति के तत्वावधान में सूरजपोल स्थित निम्बार्क महाविद्यालय रामलीला प्रांगण में चल रही रामलीला के छठे दिन बुधवार को भक्ति, त्याग, विरह और भ्रातृ-प्रेम की ऐसी अविरल धारा बही कि दर्शक भाव-विभोर हो उठे। एक ओर जहां केवट का अनन्य प्रेम और समर्पण जीवंत हुआ, वहीं दूसरी ओर अयोध्या में पुत्र-विरह में राजा दशरथ के प्राण-त्याग और चित्रकूट के पावन तट पर भरत-राम मिलन के कारुणिक प्रसंगों ने हर आंख को नम कर दिया।
छठे दिन के मंचन का सबसे हृदयस्पर्शी क्षण श्रीराम-केवट संवाद रहा। प्रभु श्रीराम जब गंगा पार करने के लिए नौका मांगते हैं, तब निष्काम भक्त केवट प्रभु के चरण धोए बिना उन्हें नाव पर बैठाने से साफ़ मना कर देता है। केवट का तर्क और उसकी बाल-सुलभ भक्ति देखकर प्रभु श्रीराम मुस्कुरा उठते हैं। जब गोस्वामी तुलसीदास श्रीराम चरित मानस में यह चौपाई लिखते हैं, अति सनेह बस नाव न आनइ। काहइ रानि बिधि आयसु मानइ॥पद कमल पखारि न्‍नाव चढ़ाइहौं। मोहि लगि नाथ न आजु अकुलाइहौं॥
केवट ने प्रभु के चरणों को पखारकर उस जल को परिवार सहित आचमन किया और अपना एवं अपने पितरों का उद्धार कर लिया। केवट की निष्छल भक्ति और प्रभु श्रीराम द्वारा उसे गले लगाने के इस दृश्य ने प्रांगण को ‘जय श्रीराम’ के जयघोषों से गुंजायमान कर दिया।
इसके पश्चात मंच पर राजा दशरथ द्वारा ‘राम-राम’ रटते हुए प्राण त्यागने का कारुणिक दृश्य जीवंत हुआ, जिसे देखकर दर्शक स्तब्ध रह गए। तत्पश्चात, ननिहाल से लौटे भरत को जब माता कैकेयी के वचनों और राम के वनवास का ज्ञान होता है, तब भ्रातृ-प्रेम की जो पराकाष्ठा प्रस्तुत होती है, संभवत: इसी पराकाष्ठा से शब्दकोश में ‘भरत—मिलाप’ शब्द का जन्म होता है, जो आज भी आदर्श और उदाहरणीय है।
चित्रकूट में भरत मिलन प्रसंग के भावपूर्ण मंचन में हर आंख छलछला आई। भ्राता भरत द्वारा प्रभु श्रीराम की पादुकाओं को शीश पर धारण कर अयोध्या लौटने के दृश्य ने भी त्याग और धर्म की अलौकिक परिभाषा गढ़ दी।
रामलीला केवल आयोजन नहीं, संस्कारों का शब्दकोश है — धर्मनारायण जोशी
बुधवार को आगंतुक अतिथियों का स्वागत करते हुए श्रीराम लीला समिति के अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने कहा कि रामलीला महज एक नाटक या आयोजन नहीं है, अपितु यह हमारे व्यक्तित्व और संस्कारों का जीवंत शब्दकोश है। रामलीला का प्रत्येक प्रसंग, हर एक चौपाई और संवाद मानव जीवन को मर्यादा, त्याग और समर्पण की अनमोल सीख दे जाता है। वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री भगवान सहाय ने कहा कि रामलीला भगवान राम का जीवनदर्शन समाज के समक्ष साक्षात प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम है। राम का जीवन आदर्श व मार्गदर्शक हैं।
विशिष्ट अतिथियों का हुआ आत्मीय सम्मान
समिति के महासचिव भंवरलाल शर्मा ने बताया कि बुधवार के आयोजन में कई धार्मिक, सामाजिक एवं राजनीतिक हस्तियों ने शिरकत की। अतिथियों में महंत इंद्रदेव दास, महंत दयाराम, महंत नारायण दास, वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री भगवान सहाय, पूर्व महापौर रजनी डांगी, भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. अलका मूंदड़ा, विश्व हिन्दू परिषद् के महानगर अध्यक्ष सुशील मूंदड़ा, पार्षद आशीष कोठारी, पूर्व आरएएस दिनेश कोठारी, समाजसेवी सुंदरलाल सोनी, राधिका लढ्ढा, पार्षद प्रदीप विजयवर्गीय, पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, पूर्व सभापति युधिष्ठिर कुमावत, सेवानिवृत्त आईपीएस टीसी डामोर, वात्सल्य सेवा समिति अध्यक्ष प्रकाश अग्रवाल, गुर्जर गौड़ समाज अध्यक्ष राकेश जोशी, मारू औदीच्य समाज के शिव शंकर शर्मा, वारी समाज के सांवरलाल वारी, भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी अमर सिंह सांखला, गर्ग समाज के गिरवर गोपाल गर्ग, समाजसेवी दिलीप सिंह राठौड़, विष्णु सुहालका, सुखवाल समाज के पूर्व अध्यक्ष पृथ्वीराज सुखवाल, उद्योगपति व समाजसेवी धीरेंद्र सच्चान, मावली पालिकाध्यक्ष राकेश मीणा, साहित्य परिषद के प्रान्त अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह राव ‘मृत्युंजय’, मावली पार्षद बादल शर्मा, निर्मल लोढ़ा एवं ओमप्रकाश खोखावत शामिल रहे।
सभी अतिथियों का सम्मान विप्र फाउंडेशन प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र पालीवाल, समन्वयक अशोक बाबेल, हरीश मारवाड़ा, प्रवक्ता कौशल मूंदड़ा, चेतन माली, चैनशंकर दशोरा, धरणीधर तिवारी, जगन्नाथ शर्मा, दुर्गेश सुखवाल, गजेंद्र चौबीसा, निर्मल चौबीसा, दीपक डांगी, अरुण त्रिवेदी, एडवोकेट दिनेश गुप्ता, राकेश पालीवाल, अविनाश अग्रवाल आदि कार्यकर्ताओं ने किया।
सुबह मारवाड़ी परिवार ने की तीनों स्वरूपों की पधरावणी
समिति के समन्वयक अशोक बाबेल ने बताया कि बुधवार प्रातः शहर के अमल का कांटा स्थित मारवाड़ी परिवार की ओर से श्रीराम, लक्ष्मण एवं माता जानकी के स्वरूपों की पावन पधरावणी की गई। श्रीमती हेमलता मारवाड़ी, मधु-मुकेश मारवाड़ी, शीनू-विपिन मारवाड़ी और मीनू-हिमांशु मारवाड़ी सहित कई गणमान्य अतिथियों ने तीनों स्वरूपों की भावभरी अगवानी की। माताओं ने भक्तिभाव से स्वरूपों के चरण प्रक्षालन किए, आरती की और उन्हें भोजन जिमाया। इस अवसर पर पुष्टिमार्गीय श्री कृष्णलीला संस्थान वृंदावन के प्रमुख वेदप्रकाश भारद्वाज, सीताराम भारद्वाज एवं घनश्याम शर्मा सहित अन्य साधकों ने वेद मंत्रों और स्वस्तिवाचन के साथ आशीर्वाद दिया। सभी कलाकारों का सम्मान किया गया। इसके उपरांत तीनों स्वरूपों को भव्य बग्घियों में बिराजमान करवाकर गाजे-बाजों के साथ मंडली निवास स्थल चम्पालाल धर्मशाला तक लाया गया।
गुरुवार को होगा ‘सीता-हरण’ का मंचन
संयोजक डॉ. विजय प्रकाश विप्लवी ने बताया कि 15 अक्टूबर गुरुवार को श्रीराम-ऋषि मिलन, गिद्धराज जटायु प्रसंग, शूर्पणखा नासिका भंग, खर-दूषण वध एवं सीता हरण की लंकाकाण्ड-पूर्व लीला का मंचन होगा। 16 अक्टूबर को शबरी मिलन, श्रीराम-सुग्रीव मित्रता, सीता अन्वेषण एवं लंका दहन तथा 17 अक्टूबर को श्रीराम सेना प्रस्थान, विभीषण शरणागति, सेतुबंध रामेश्वरम् स्थापना, अंगद-रावण संवाद एवं लक्ष्मण शक्ति के अद्भुत प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।

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