लोभ का त्याग और विचारों की पवित्रता ही सच्चे शौच धर्म का स्वरूपःपंडित रविकीर्ति
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उदयपुर, 19 सितम्बर: महावीर भवन सेक्टर-14 में पर्युषण पर्व श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के चतुर्थ दिन उत्तम शौच धर्म के अवसर पर प्रातःकाल श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। शांतिधारा का पुण्यार्जन लक्ष्मीलाल मालवी परिवार ने प्राप्त किया।
प्रवचन में पंडित रविकीर्ति जी ने कहा कि उत्तम शौच धर्म का वास्तविक अर्थ केवल बाहरी स्वच्छता नहीं, बल्कि आचरण में नम्रता, विचारों में निर्मलता और अंतर्मन में पवित्रता लाना है। उन्होंने कहा कि बाहरी पवित्रता तो प्रत्येक व्यक्ति रख सकता है, लेकिन आत्मिक पवित्रता तभी आती है, जब मनुष्य लोभ और विकारों से मुक्त होकर अपने मन को निर्मल बनाता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में मन, वचन और काया की एकरूपता होना आवश्यक है। मन में जो विचार हों, वही वाणी से व्यक्त हों और उसी के अनुरूप आचरण किया जाए, यही आर्जव धर्म का मूल स्वरूप है। सरलता, सहजता और निष्कपटता को जीवन में अपनाने से व्यक्ति आत्मिक शांति की ओर बढ़ता है।
इस अवसर पर सौधर्म इंद्र-इंद्राणी नरेशकुमार एवं माया देवी देवड़ा के सानिध्य में विधिवत पूजा-अर्चना की गई। भगवान पुष्पदंत के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में श्रद्धापूर्वक निर्वाण लाडू भी चढ़ाया गया।
ट्रस्ट अध्यक्ष भंवर लाल मुंडलिया एवं महामंत्री भूरीलाल जैन ने पर्युषण पर्व के दौरान तप-आराधना करने वाले सभी तपस्वियों की अनुमोदना की। उन्होंने बताया कि तपस्वियों का सम्मान समारोह 25 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा।

