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आवासीय जमीन को मिलेगा 14 अंकों का ‘भू-आधार’, लैंड स्टैक से आसान होंगे जमीन संबंधी काम

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आवासीय जमीन को मिलेगा 14 अंकों का ‘भू-आधार’, लैंड स्टैक से आसान होंगे जमीन संबंधी काम

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एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से भूमि रिकॉर्ड, स्वामित्व और पंजीकरण की जानकारी होगी ऑनलाइन, विभागों के चक्कर से मिलेगी राहत
उदयपुर, 17 अप्रैल:
आवासीय और अकृषि जमीन से जुड़ी जानकारी के लिए अब लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। केंद्र सरकार के भूमि संसाधन विभाग ने ‘लैंड स्टैक’ नामक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जिसके तहत प्रत्येक आवासीय या कन्वर्टेड भूखंड को 14 अंकों का यूनिक भू-आधार नंबर दिया जाएगा। इससे भूमि अभिलेख, स्वामित्व, पंजीकरण और भवन संबंधी सूचनाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।
अभी तक आमजन को आबादी भूमि या कन्वर्टेड प्लॉट की जानकारी के लिए राजस्व, पंजीयन, स्थानीय निकाय और अन्य विभागों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती थी। लैंड स्टैक के लागू होने से यह प्रक्रिया सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए सरल और पारदर्शी बन जाएगी।
यह एक जीआईएस आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जिसमें भूमि, स्वामित्व, पंजीकरण, भवन और उपयोगिता सेवाओं से जुड़ा डेटा एकीकृत रहेगा। इससे न केवल विभागीय समन्वय बेहतर होगा, बल्कि भूमि विवाद और धोखाधड़ी पर भी रोक लगेगी। लोग घर बैठे डिजिटल हस्ताक्षरित और कानूनी रूप से मान्य भूमि अभिलेख डाउनलोड कर सकेंगे, वहीं बैंक भी ऑनलाइन सत्यापन कर पाएंगे, जिससे ऋण प्रक्रिया तेज होगी।
डिजिटल डेटा उपलब्ध होने से भूमि मानचित्रण और सर्वेक्षण कार्यों में भी तेजी आएगी। दुर्गम क्षेत्रों में हवाई सर्वेक्षण से स्पष्ट नक्शे तैयार किए जा सकेंगे। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, उचित मुआवजा और पुनर्वास प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और आसान होगी। यूनिक राजस्व शब्दावली से भाषाई विविधता की समस्या खत्म होगी और बेनामी लेनदेन पर अंकुश लगेगा।
राजस्थान में इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट जयपुर शहर और टोंक जिले की उनियारा तहसील के गुमानपुरा गांव में शुरू किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद इसे पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। केंद्र सरकार का मानना है कि जैसे फार्मर रजिस्ट्री से कृषि भूमि संबंधी प्रक्रियाएं आसान हुई हैं, उसी तरह भू-आधार आधारित लैंड स्टैक से कन्वर्टेड जमीन और आवासीय भूखंडों के मामलों का समाधान तेजी से होगा तथा भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ भी इसी प्रणाली के जरिए दिया जा सकेगा।

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