विरासत संरक्षण में समाज की साझी जिम्मेदारी निभानी होगी : डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़
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मुंबई में ‘द लेगेसी ऑफ मेवाड़’ संवाद, परोपकार, सांस्कृतिक धरोहर और सतत संरक्षण पर हुआ मंथन
उदयपुर/मुंबई, 29 जुलाई: भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, उत्तरदायी संरक्षकत्व और परोपकार की भूमिका पर केंद्रित विशेष संवाद ‘द लेगेसी ऑफ मेवाड़ : विरासत संरक्षण, परंपरा, नेतृत्व और परोपकार’ का आयोजन मुंबई में किया गया। कार्यक्रम में मेवाड़ राजघराने के 77वें श्री एकलिंग दीवान श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि विरासत किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की अमूल्य धरोहर है, जिसके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी सभी की है।
महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मयंक गुप्ता ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत मेवाड़ राजवंश की 1500 वर्ष पुरानी गौरवशाली विरासत और फाउंडेशन के संरक्षण कार्यों पर आधारित प्रेरक फिल्म से हुई। इसके बाद वॉटरफील्ड एडवाइजर्स की संस्थापक एवं सीईओ सौम्या राजन के संचालन में विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक पहचान, सतत पर्यटन, विरासत प्रबंधन, परोपकार और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि संरक्षण केवल ऐतिहासिक इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों, परंपराओं और सामुदायिक स्मृतियों को जीवित रखना भी उतना ही आवश्यक है। कार्यक्रम के प्रश्नोत्तर सत्र में विशेषज्ञों और अतिथियों ने विरासत संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े मुद्दों पर विचार साझा किए। समापन अवसर पर भारत की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र और समाज के सामूहिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
