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परिवहन मंत्रालय के फैसले से बस बॉडी निर्माताओं में आक्रोश

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परिवहन मंत्रालय के फैसले से बस बॉडी निर्माताओं में आक्रोश

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मान्यता अनिवार्य होने से कारोबार ठप होने और रोजगार संकट की आशंका
उदयपुर, 9 जनवरी:
स्लीपर कोच बसों में आग लगने की लगातार घटनाओं के बाद केंद्रीय परिवहन मंत्रालय द्वारा बस निर्माण को केवल ऑटोमोबाइल कंपनियों या सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थानों तक सीमित करने के फैसले से उदयपुर सहित संभागभर के बस बॉडी निर्माताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि इस निर्णय से उनका व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित होगा और हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।
परिवहन मंत्रालय ने बीते छह महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में स्लीपर कोच बसों में आग की छह बड़ी घटनाओं, जिनमें करीब 145 यात्रियों की मौत हुई, को गंभीरता से लेते हुए यह फैसला किया है। मंत्रालय का मानना है कि मौजूदा स्लीपर बसों को नए सुरक्षा मानकों के अनुसार अपडेट करना जरूरी है। इसके तहत फायर डिटेक्शन सिस्टम, आपातकालीन निकास, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर ड्राउजीनेस इंडिकेटर जैसे उपकरण अनिवार्य किए जाएंगे, ताकि हादसे की स्थिति में यात्रियों को समय रहते बाहर निकाला जा सके।
हालांकि इस फैसले को लेकर उदयपुर, राजसमंद और आसपास के क्षेत्रों में संचालित बस बॉडी कारखानों के संचालक असहमति जता रहे हैं। भुवाणा स्थित बस बॉडी निर्माता सत्यनारायण चौधरी का कहना है कि यदि केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों को ही निर्माण की अनुमति दी गई, तो छोटे और मध्यम कारखानों को बंद करने की नौबत आ जाएगी। वर्तमान में उदयपुर-राजसमंद क्षेत्र में 100 से अधिक बस बॉडी कारखाने संचालित हैं, जिनसे हजारों इंजीनियर, मैकेनिक और श्रमिक जुड़े हुए हैं।
सुखेर स्थित कारखाना संचालक गजानंद मेनारिया के अनुसार छोटे कारखानों में सालभर में 3 से 4 बसों की बॉडी बनती है, जबकि बड़े कारखानों में 15 से 20 बस बॉडी तैयार होती हैं, जिससे 500 से 700 लोगों को रोजगार मिलता है। प्रतापनगर बेड़वास स्थित कारखाना मालिक उदयलाल लौहार ने कहा कि इस फैसले से सिर्फ कारखानों के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े उपकरण आपूर्तिकर्ता और व्यापारी भी प्रभावित होंगे।
बस बॉडी निर्माताओं ने सरकार से मांग की है कि सुरक्षा मानकों को लागू करने के साथ-साथ छोटे और मध्यम कारखानों को मान्यता देने की सरल व्यवस्था की जाए, ताकि रोजगार और उद्योग दोनों सुरक्षित रह सकें।

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