272 भूखंड घोटाले के असली चेहरे अब भी बेनकाब नहीं
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छोटे मोहरे गिरफ्त में, लेकिन 16 माह बाद भी मुख्य आरोपी जांच से बाहर
उदयपुर, 30 अप्रैल: नगर निगम के बहुचर्चित 272 भूखंड घोटाले में कार्रवाई की रफ्तार और दिशा दोनों सवालों के घेरे में हैं। करीब 16 महीने गुजर जाने के बाद भी जांच एजेंसी एसओजी अब तक चार्जशीट पेश नहीं कर सकी है। अब तक आठ गिरफ्तारियां जरूर हुईं, लेकिन जिन लोगों को पकड़ा गया वे केवल निचले स्तर के मोहरे माने जा रहे हैं, जबकि पूरे खेल के सूत्रधार अब भी जांच की पकड़ से बाहर हैं। ऐसे में यह सवाल तेज हो गया है कि आखिर करोड़ों के इस घोटाले के असली जिम्मेदार कौन हैं और वे अब तक सुरक्षित क्यों हैं?
फर्जी दस्तावेजों से खुर्द-बुर्द हुए 272 भूखंड
प्रतापनगर और आसपास के क्षेत्रों में यूआईटी से नगर निगम को हस्तांतरित 272 भूखंडों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें अवैध रूप से बेचने का मामला सामने आया था। जांच में कई आवंटन रद्द हुए, लेकिन आरोप है कि फर्जी फाइलों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी अभी तक जांच के घेरे में नहीं आए। पूर्व पार्षद अजय पोरवाल का कहना है कि उन्होंने पर्याप्त सबूत दिए, लेकिन कार्रवाई केवल “कठपुतलियों” तक सीमित रही।
राजनीतिक दबाव बढ़ा, फिर भी मास्टरमाइंड बाहर
विधायक ताराचंद जैन यह मामला दो बार विधानसभा में उठा चुके हैं। उनका आरोप है कि बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा है। अब एसओजी स्पेशल पीपी नियुक्त कर कानूनी कार्रवाई तेज करने की तैयारी में है, लेकिन सवाल यही है कि जब तक असली मास्टरमाइंड सामने नहीं आते, तब तक क्या इस घोटाले को न्याय मिल पाएगा?
