WHO के एक मॉडल से दुनिया स्वस्थ नहीं हो सकती: भैयाजी जोशी
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उदयपुर में सेवा भारती के प्राकृतिक आरोग्य केंद्र का शुभारंभ, बोले— समानांतर चिकित्सा व्यवस्था को मिले समान सम्मान
उदयपुर, 16 जुलाई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मौजूदा वैश्विक स्वास्थ्य मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरी दुनिया के स्वास्थ्य की चिंता केवल एक संस्था या एक ही दृष्टिकोण से करना न तो व्यावहारिक है और न ही वैज्ञानिक। उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश की जलवायु, खान-पान, संस्कृति और जीवनशैली अलग होती है, इसलिए स्वास्थ्य व्यवस्था भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित होनी चाहिए।
सेवा भारती चिकित्सालय के प्राकृतिक आरोग्य केंद्र के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एलोपैथी को ही प्रमुख और अन्य चिकित्सा पद्धतियों को वैकल्पिक मानना उचित नहीं है। भारतीय चिंतन सभी चिकित्सा पद्धतियों को समानांतर व्यवस्था के रूप में स्वीकार करता है। यदि चिकित्सा जगत इस दृष्टिकोण को अपनाए तो कई विवाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
उन्होंने बताया कि उदयपुर में करीब 22 वर्ष बाद प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र की शुरुआत हुई है, जहां भविष्य में अन्य चिकित्सा पद्धतियों को भी जोड़ा जाएगा। उनका कहना था कि चिकित्सा सेवाओं में गुणवत्ता के साथ-साथ आमजन की पहुंच और वहनीयता भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
भैयाजी जोशी ने कहा कि स्वस्थ समाज का लक्ष्य केवल अस्पतालों और डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने से पूरा नहीं होगा। ऐसी जीवनशैली और सामाजिक वातावरण बनाना होगा जिससे लोगों को अस्पताल जाने की आवश्यकता ही कम पड़े। उन्होंने ‘मेंटल हेल्थ’ के बजाय ‘मानस के स्वास्थ्य’ पर बल देते हुए कहा कि स्वस्थ मन के लिए संयम, साधना, सकारात्मक जीवनशैली और सामाजिक जागरूकता जरूरी है, क्योंकि मन को स्वस्थ रखने की कोई रेडीमेड दवा नहीं होती।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, सांसद मन्नालाल रावत, विधायक ताराचंद जैन, उद्योगपति संजय सिंघल, राहुल अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
