15 साल पुराने रिश्वत प्रकरण में तत्कालीन अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी दोषी करार
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विशेष अदालत ने रणछोड़ गर्ग को दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई, सरकारी वकील बोले- अभियोजन ने आरोप संदेह से परे साबित किए
उदयपुर, 7 अगस्त: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों की विशेष अदालत-1, उदयपुर ने 15 वर्ष पुराने रिश्वत प्रकरण में तत्कालीन अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) रणछोड़ गर्ग को दोषी करार देते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 एवं धारा 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) के तहत दो-दो वर्ष के साधारण कारावास तथा प्रत्येक धारा में 10-10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश सतीश चंद्र गोदारा ने सुनाया।
प्रकरण के अनुसार वर्ष 2008 में बागीदौरा क्षेत्र के शिक्षक शंकरलाल रावत ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके विरुद्ध एक महिला पैराटीचर की शिकायत का निस्तारण उनके पक्ष में करने के बदले रणछोड़ गर्ग ने 5 हजार रुपए रिश्वत मांगी। एसीबी ने मांग का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद 13 मई 2008 को ट्रैप कार्रवाई के दौरान आरोपी को 2 हजार रुपए की पहली किश्त लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। रिश्वत की राशि आरोपी की शर्ट की जेब से बरामद हुई और रासायनिक परीक्षण भी सकारात्मक मिला।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 19 गवाह, 52 दस्तावेज और 9 भौतिक साक्ष्य पेश किए। अदालत ने माना कि रिश्वत मांगने और स्वीकार करने का आरोप संदेह से परे सिद्ध हुआ है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि लोक सेवकों द्वारा वैध कार्य के बदले रिश्वत मांगना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में नरमी बरतना न्यायोचित नहीं होगा।
प्रकरण में राज्य सरकार की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक राजेश पारीक ने पैरवी की। उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि आरोपी ने अपने अधीनस्थ शिक्षक से लंबित जांच में राहत देने के बदले रिश्वत की मांग की और पहली किश्त स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता दुर्गा प्रसाद खींचा ने आरोपी की आयु, लंबी न्यायिक प्रक्रिया और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए नरमी की मांग की, लेकिन अदालत ने उसे अस्वीकार करते हुए दोषसिद्धि और सजा का आदेश पारित किया।

